नई दिल्ली. मोटर इंश्योरेंस क्लेम सेटलमेंट को आसान बनाने की प्रक्रिया के तहत इंश्योरेंस रेगुलेटर भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण ने सेल्फ-असेस्मेंट डैमेज की लिमिट को बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है. अगर ऐसा होता है तो जल्द ही मोटर इंश्योरेंस के 75 हजार रुपये तक के क्लेप पर नुकसान के मूल्यांकन के लिए किसी सर्वेयर की जरूरत नहीं पड़ेगी. वहीं ग्राहकों के लिए इंश्योरेंस क्लेम में लगने वाला समय भी कम हो जाएगा.

फिलहाल, 50,000 रुपये से ऊपर के मोटर इंश्योरेंस और 1 लाख रुपये से ज्यादा के अन्य दावों के लिए इंश्योरेंस सर्वेयर और लॉस एसेसर्स की सेवाएं लेना जरूरी है. जब दावे के आकलन के लिए सर्वेयर की नियुक्ति की जाती है तो उन्हें दावे की समीक्षा और रिपोर्ट जमा करने के लिए 30 दिन मिलते हैं. इससे दावों के निस्तारण में देरी होती है, क्योंकि बीमा कंपनी रिपोर्ट की समीक्षा के बाद ही कोई फैसला लेती है.

मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक अब इरडा की नई सिफारिशों को मान लिया जाता है तो मोटर इंश्योरेंस के लिए 75 हजार रुपये और नॉन- मोटर इंश्योरेंस के मामलों में 1.50 लाख रुपये तक दावा ग्राहक कर सकता है. इससे पहले दो समितियों मल्होत्रा समिति और भंडारी समिति ने अपनी रिपोर्ट में सर्वे के लिए नुकसान की सीमा को बढ़ाए जाने का सुझाव दिया था. इन समितियों ने यह भी सुझाव दिया था कि बीमा कंपनियों के भीतर उपलब्ध कार्यबल को नुकसान की इस सीमा तक के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए, जिससे ऐसे दावों के निस्तारण में तेजी आएगी.

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