औरंगाबाद. महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर गठबंधन सहयोगी भारतीय जनता पार्टी के साथ जारी खींचतान के बीच शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने रविवार को कहा कि लोगों को जल्दी ही इस बात की जानकारी हो जायेगी कि क्या उनकी पार्टी राज्य में सत्ता में होगी. उद्धव ने कहा कि महाराष्ट्र में असमय हुई बारिश के कारण किसानों की फसलों के नुकसान के लिए राज्य सरकार की ओर से 10 हजार करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा अपर्याप्त है.

महाराष्ट्र विधानसभा के लिए 21 अक्टूबर को हुए मतदान के परिणाम के बाद भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना के बीच मुख्यमंत्री का पद साझा करने को लेकर जबरस्त खींचतान चल रही है और अब तक सरकार गठन को लेकर औपचारिक बातचीत शुरू नहीं हो सकी है. ठाकरे ने यहां संवाददाता सम्मेलन में एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि आपको आने वाले दिनों में जानकारी मिल जायेगी कि क्या शिवसेना (प्रदेश में) सत्ता में होगी.

इसके बाद पूछे गये किसी भी राजनीतिक सवाल का जवाब देने से उद्धव ने मना कर दिया. वह पिछले दिनों हुई बारिश से फसलों के नुकसान का जायजा लेने के लिए औरंगाबाद आये हुए थे. ठाकरे ने बताया कि उन्होंने जिले के कन्नाड एवं वैजापुर इलाके के किसानों के साथ बातचीत की. उन्होंने राज्य नेतृत्व पर हमला बोलते हुए कहा कि क्षति की समीक्षा हेलीकॉप्टर से नहीं की जा सकती है.

शिवसेना प्रमुख ने विधानसभा चुनाव के दौरान अपने भाषणों में यह कहने के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को परोक्ष रूप से आड़े हाथ लिया कि वह (मुख्यमंत्री के रूप) फिर वापस आयेंगे. उन्होंने कहा कि लौटता मॉनसून कहता है मैं वापस आऊंगा. लोग अब लौटते मॉनसून से भयभीत हैं, जो कहता है कि वह वापस लौटेगा. ठाकरे ने कहा कि बेमौसम बारिश के कारण किसानों को फसलों के नुकसान के लिए 10 हजार करोड़ का मुआवजा अपर्याप्त है.

उन्होंने कहा कि किसानों को प्रति हेक्टेयर कम से कम 25 हजार से 50 हजार रुपये का मुआवजा दिया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि किसानों को उनके अधिकार मिलने चाहिए. ठाकरे ने केंद्र सरकार से यह मांग की कि वह लोगों को यह बताये कि क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक सहयोग (आरसीईपी) से देश को किस प्रकार फायदा होगा.

आरसीईपी में आसियान के 10 देशों के अलावा भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे छह अन्य देश शामिल हैं, जो मुक्त व्यापार के लिए बातचीत कर रहे हैं. कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने शनिवार को कहा था कि कि आरसीईपी समझौते पर हस्ताक्षर करने के परिणामस्वरूप किसानों, दुकानदारों और छोटे उद्यमों को भारी परेशानी होगी.

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