* जो साधक धर्म-कर्म और ज्योतिष के क्षेत्र में सेवारत हैं उनके लिए देवी उपासना दिव्य शक्तियां प्राप्त करने का सर्वोत्तम मार्ग है. 

* जितने भी प्रसिद्ध ज्योतिषी हुए हैं उनमें से ज्यादातर देवी उपासक रहे हैं क्योंकि किसी विषय का ज्ञान आंख की तरह है जो देखने की शक्ति तो देता है लेकिन अंधेरे में देखने की क्षमता दिव्य शक्तियों के प्रकाश के बगैर असंभव है.

* जो साधक धर्म-कर्म और ज्योतिष के क्षेत्र में कामयाबी चाहते हैं उन्हें  मासिक दुर्गाष्टमी पर नियमितरूप से संकल्प लेकर पूजा-अर्चना करनी चाहिए, समय के साथ उन्हें अहसास होगा कि कोई शक्ति उन्हें सही मार्ग दिखा रही है!

* साधना के लिए उत्तम गुरु मिल जाए तो अच्छा है, नहीं तो अपनी ज्ञान-क्षमता से देवी आराधना प्रारंभ करें, सारी बाधाएं अपनेआप समाप्त होती चली जाएंगी.

* यदि अखंड प्रदीप रख सकें तो देवी साधना के परिणाम जल्दी प्राप्त होते हैं लेकिन अपना मन सात्विक पूजा पर ही केन्द्रीत रखें, सही जानकारी के अभाव में जिद्दी साधना के परिणाम अक्सर खराब होते हैं!

- आज का राशिफल -

निम्न राशि के लिए उत्तम चन्द्रबलम अगले दिन सूर्योदय तक:

मेष, कर्क, सिंह,
वृश्चिक, मकर, मीन*मिथुन राशि में जन्में लोगो के लिए अष्टम चन्द्र  

* यहां राशिफल चन्द्र के गोचर पर आधारित है, व्यक्तिगत जन्म के ग्रह और अन्य ग्रहों के गोचर के कारण शुभाशुभ परिणामों में कमी-वृद्धि संभव है, इसलिए अच्छे समय का सद्उपयोग करें और खराब समय में सतर्क रहें. 

सोमवार का चौघडिय़ा -

दिन का चौघडिय़ा      रात्रि का चौघडिय़ा

पहला- अमृत            पहला- चर

दूसरा- काल             दूसरा- रोग

तीसरा- शुभ            तीसरा- काल

चौथा- रोग             चौथा- लाभ

पांचवां- उद्वेग         पांचवां- उद्वेग

छठा- चर              छठा- शुभ

सातवां- लाभ          सातवां- अमृत

आठवां- अमृत          आठवां- चर

* चौघडिय़ा का उपयोग कोई नया कार्य शुरू करने के लिए शुभ समय देखने के लिए किया जाता है. 

* दिन का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* रात का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* अमृत, शुभ, लाभ और चर, इन चार चौघडिय़ाओं को अच्छा माना जाता है और शेष तीन चौघडिय़ाओं- रोग, काल और उद्वेग, को उपयुक्त नहीं माना जाता है.

* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, स्थानीय पंरपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं.

* अपने ज्ञान के प्रदर्शन एवं दूसरे के ज्ञान की परीक्षा में समय व्यर्थ गंवाएं क्योंकि ज्ञान अनंत है और जीवन का अंत है!   

 पंचांग

सोमवार, 4 नवंबर 2019

गोपाष्टमी

मासिक दुर्गाष्टमी

शक सम्वत 1941   विकारी

विक्रम सम्वत 2076

काली सम्वत 5121

दिन काल 10:59:20

मास कार्तिक

तिथि अष्टमी - 28:59:33 तक

नक्षत्र श्रवण - 27:23:55 तक

करण विष्टि - 15:55:25 तक, बव - 28:59:33 तक

पक्ष शुक्ल

योग गण्ड - पूर्ण रात्रि तक

सूर्योदय 06:34:54

सूर्यास्त 17:34:14

चन्द्र राशि मकर

चन्द्रोदय 13:07:59

चन्द्रास्त 23:59:00

ऋतु हेमंत

दिशा शूल: पूर्व में

राहु काल वास: उत्तर-पश्चिम में

नक्षत्र शूल: कोई नहीं

चन्द्र वास: दक्षिण में

आज का दिन : ज्योतिष की नज़र में


जानिए कैसा रहेगा आपका भविष्य


खबर : चर्चा में


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