- प्रदीप कुमार द्विवेदी   

* दक्षिण भारत में स्कन्ददेव की पूजा-अर्चना खास तौर पर की जाती है और इसीलिए स्कन्द षष्ठी का विशेष महत्व भी है.

* स्कन्ददेव भगवान भोलेनाथ और देवी पार्वती के पुत्र और भगवान श्रीगणेश के छोटे भाई हैं. 

* इन्हें मुरुगन, कार्तिकेय, सुब्रहमन्य आदि कई नामों से जाना जाता है.

* षष्ठी तिथि भगवान स्कन्द को समर्पित हैं और इसीलिए शुक्ल पक्ष की षष्ठी के दिन श्रद्धालु व्रत-उपवास रखते हैं. 

सर्वसुख प्रदान करती है छठ पूजा...  

  * सायंकाल  अर्ध्य... पूरे दिन उपवास रखकर शाम के समय डूबते हुए सूर्य को अर्ध्य देने के लिए पूजा का सामान घाट पर ले जाते हैं. 

* शाम को सूर्य को अर्ध्य देने के बाद घर आकर सारा सामान वैसा ही रखते हैं. 

* इस अवसर पर रात को छठी माता के गीत गाते हैं और व्रत कथा सुनते है.

* सुबह का अर्ध्य.. अगले दिन प्रात:काल सूर्योदय से पहले ही घाट पर पहुंचते हैं. उगते हुए सूर्य की पहली किरण को अर्ध्य देते हैं. 

* इसके बाद घाट पर छठ माता को प्रणाम-प्रार्थना कर उनसे संतान-रक्षा का वर मांगते हैं. 

* अर्ध्य देने के बाद घर लौटकर सभी को प्रसाद प्रदान करते हैं तथा स्वयं भी प्रसाद ग्रहण कर व्रत खोलते हैं.

* ऐसा माना जाता है कि... जो भी श्रद्धालु इस महाव्रत को पवित्र मन-वचन-कर्म से करते हैं उन्हें उत्तम संतान सुख प्राप्त होता है और जीवन  में सर्वसुख प्राप्त होते हैं.

- आज का राशिफल -

 निम्न राशि के लिए उत्तम चन्द्रबलम 29:27 तक:

मिथुन, कर्क, तुला,
धनु, कुम्भ, मीन

*वृषभ राशि में जन्में लोगो के लिए अष्टम चन्द्र

उसके पश्चात -

निम्न राशि के लिए उत्तम चन्द्रबलम अगले दिन सूर्योदय तक:

मेष, कर्क, सिंह,
वृश्चिक, मकर, मीन

*मिथुन राशि में जन्में लोगो के लिए अष्टम चन्द्र

*यहां राशिफल चन्द्र के गोचर पर आधारित है, व्यक्तिगत जन्म के ग्रह और अन्य ग्रहों के गोचर के कारण शुभाशुभ परिणामों में कमी-वृद्धि संभव है, इसलिए अच्छे समय का सद्उपयोग करें और खराब समय में सतर्क रहें.

- शनिवार का चौघडिय़ा -

दिन का चौघडिय़ा       रात्रि का चौघडिय़ा

पहला- काल              पहला- लाभ

दूसरा- शुभ              दूसरा- उद्वेग

तीसरा- रोग              तीसरा- शुभ

चौथा- उद्वेग             चौथा- अमृ

पांचवां- चर               पांचवां- चर

छठा- लाभ                छठा- रोग

सातवां- अमृत            सातवां- काल

आठवां- काल             आठवां- लाभ

* चौघडिय़ा का उपयोग कोई नया कार्य शुरू करने के लिए शुभ समय देखने के लिए किया जाता है 

* दिन का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* रात का चौघडिय़ाअपने शहर में सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* अमृत, शुभ, लाभ और चर, इन चार चौघडिय़ाओं को अच्छा माना जाता है और शेष तीन चौघडिय़ाओं- रोग, काल और उद्वेग, को उपयुक्त नहीं माना जाता है.

* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, स्थानीय पंरपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं.

* अपने ज्ञान के प्रदर्शन एवं दूसरे के ज्ञान की परीक्षा में समय व्यर्थ गंवाएं क्योंकि ज्ञान अनंत है और जीवन का अंत है! 

पंचांग

शनिवार, 2 नवंबर 2019

शक सम्वत 1941 विकारी

विक्रम सम्वत 2076

काली सम्वत 5121

दिन काल 11:02:14

मास कार्तिक

तिथि षष्ठी - 25:33:41 तक

नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा - 23:02:11 तक

करण कौलव - 13:07:37 तक, तैतिल - 25:33:41 तक

पक्ष शुक्ल

योग सुकर्मा - 06:50:24 तक, धृति - 30:22:38 तक

सूर्योदय 06:33:28

सूर्यास्त 17:35:42

चन्द्र राशि धनु - 29:26:42 तक

चन्द्रोदय 11:33:59

चन्द्रास्त 22:08:59

ऋतु हेमंत

दिशा शूल: पूर्व में

राहु काल वास: पूर्व में

नक्षत्र शूल: कोई नहीं

चन्द्र वास: पूर्व में 29:27 तक, दक्षिण में 29:27 से

आज का दिन : ज्योतिष की नज़र में


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