पुणे. भारतीय टीम के पूर्व विकेटकीपर फारुख इंजीनियर अपने बेबाक अंदाज के लिए जाने जाते हैं. वह अपनी बात खुलकर बोलते हैं. मंगलवार को पुणे पहुंचे इंजीनियर ने एक ओर जहां सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त प्रशासकों की समिति (सीओए) पर जमकर निशाना साधा वहीं दूसरी ओर सिलेक्टर्स को भी आड़े हाथों लिया.

इंजीनियर ने कहा, टीम चयन की प्रक्रिया में विराट कोहली की बहुत अहम भूमिका है जो एक बहुत अच्छी बात है. लेकिन सिलेक्टर्स की क्या खूबी है? सभी सिलेक्टर्स ने मिलकर कुल 10-12 टेस्ट मैच खेले होंगे. मैंने इनमें से एक सिलेक्टर को पहचाना भी नहीं था. मैंने किसी से पूछा यह कौन था जिसने भारत का ब्लेजर पहन रखा था, तो उसने बताया कि यह एक सिलेक्टर है. वे सिर्फ अनुष्का शर्मा (विराट की पत्नी) को चाय के कप दे रहे थे. मुझे लगता है कि दिलीप वेंगसरकर के कद के किसी इनसान चयन समिति में होना चाहिए.

मुंबई के लिए 1958-59 और 1975-76 के बीच रणजी क्रिकेट खेलने वाले इंजीनियर को लगता है कि चयनकर्ताओं ने कीपर ऋषभ पंत को भी सही तरह से मैनेज नहीं किया. उन्होंने कहा, उन्होंने कहा कि पंत को वनडे टीम से ड्रॉप नहीं किया जाना चाहिए था. पंत को कार्तिक पर तरजीह देकर वर्ल्ड कप में ले जाना चाहिए था. इससे उन्हें महेंद्र सिंह धोनी के साथ खेलकर काफी अनुभव मिलता. 

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