मनुष्य अपने जीवन को संवारने के लिए कई रत्नों को धारण करता है. प्राचनी काल से ही मनुष्य ग्रहों के प्रभाव से बचने, कष्ट निवारण और स्वास्थ्य ठीक रखने के लिए विभिन्न प्रकार के रत्न धारण करता आया है. ऐसे ही प्रभावशाली रत्नों नीलम एक चमत्कारी रत्न है. नीलम धारण करने से मन में, तीव्रता आती है, व्यवहार में बदलाव आता है.

माना जाता है कि नीलम धारण करने से व्यक्ति तरक्की की नईनई सीढ़ियां चढ़ता चला जाता है. पंडित राजीव शर्मा बताते हैं कि यह रत्न बहुत जल्दी अपना प्रभाव दिखाता है लेकिन कुछ लोगों को नीलम पहनने के बाद नकारात्मक परिणाम भी झेलने पड़ सकते हैं.  यह भी सत्य है कि जिन लोगों को नीलम रास नहीं आता, उनके जीवन तक को खतरा बना रहता है. नीलम के बारे कहा जाता है कि यह रंक से राजा और राजा को रंक तक बना देता है. नीलम धारण करते समय काफी सावधानी बरतनी चाहिए. इसका उपरत्न है नीली.

इन बातों का रखें खयाल

मेष, वृष, तुला एवं वृश्चिक लग्न वालों को नीलम धारन करना फायदेमंद है, यह भाग्योदय करता है.

यदि जन्मकुंडली में शनि चौथे, पांचवें, दसवें या ग्यारहवें भाव में हो, तो नीलम अवश्य धारण करना चाहिए.

अगर शनि षष्ठेश या अष्टमेश के साथ बैठा हो तो नीलम धारण करना श्रेष्ठत्तम होता है.

यदि शनि अपने भाव से छठे या आठवें स्थान पर स्थित हो तो नीलम अवश्य पहनें.

शनि मकर तथा कुंभ राशि का स्वामी है. यदि एक राशि श्रेष्ठ भाव में और दूसरी अशुभ भाव में हो तो नीलम न पहनें. इसके इतर अगर शनि की दोनों राशियां श्रेष्ठ भावों का प्रितिनिधत्व करती हों, तो नीलम धारण करना श्रेष्ठ होता है.

अगर किसी भी ग्रह की महादशा में शनि की अंतर्दशा चल रही हो तो नीलम अवश्य ही पहनना चाहिए.

यदि शनि सूर्य के साथ हो , सूर्य की राशि में हो या सूर्य से दृष्ट हो तो भी नीलम पहनना लाभदायक है.

यदि जन्मकुंडली में शनि वक्री,अस्तगत या दुर्बल हो और शुभ भावों का प्रतिनिधित्व कर रहा हो तो नीलम धारण करना श्रेष्ठकर माना गया है.

जो शनि ग्रह प्रधान व्यक्ति हैं, उन्हें अवश्य ही नीलम पहनना चाहिए.

क्रूर कर्म करने वालों के लिए नीलम हर समय उपयोगी माना जाता है.

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