हथेली पर पर्वतों की स्थिति अलग-अलग बनती है  शनि, सूर्य, बुध अंगुली के निचले हिस्से में रहते हैं, वहीं मंगल तर्जनी एवं अंगूठे के मध्य, शुक्र पर्वत अंगूठे के नीचे, चंद्र पर्वत कनिष्ठिका अंगुली के नीचे व कलाई के ऊपर वाले भाग में स्थित है.

पं.शिवकुमार शर्मा के अनुसार अनामिका उंगली के मूल में तथा हृदय रेखा के ऊपर का भाग सूर्य पर्वत कहलाता है. यदि सूर्य पर्वत विकसित है तो सफलता का सूचक होता है. हाथ में सूर्य पर्वत का न होना व्यक्ति के लिए साधारण स्थिति व उपेक्षित जीवन का परिचय होता है. सूर्य पर्वत का विकास ही मनुष्य को प्रतिभावान और यशस्वी बनाता है.

सूर्य पर्वत यदि पूर्णरूप से उन्नत, विकसित तथा आभायुक्त हो तो ऐसा जातक उच्च स्थान पर पहुंचने वाला होता है. ऐसा जातक हंसमुख तथा मित्रों में घुल-मिलकर चलने वाला होता है. ऐसे जातक जनसाधारण में लोकप्रिय होते हैं.

ये व्यक्ति सफल कलाकार, श्रेष्ठ संगीतज्ञ, यशस्वी चित्रकार भी होते हैं. इनमें प्रतिभा जन्मजात होती है. व्यावहारिक दृष्टि से ये ईमानदार तथा वैभवशाली जीवन जीने के इच्छुक होते हैं. ऐसे जातक सफल व्यापारी एवं उत्तम आय वाले होते हैं.

सूर्य पर्वत वाले जातक सामने वाले के मन की थाह पाने वाले होते हैं. हथेली में यदि सूर्य पर्वत विकसित हो तो सामान्य व्यक्ति भी श्रेष्ठ धन संपन्‍न होता है. इनके जीवन में कई बार आकस्मिक धन की प्राप्ति होती है. इनका रहन-सहन राजसी और वैभवपूर्ण होता है. ऐसे व्‍यक्ति हृदय से कोमल होते हैं और बड़ी ही सहजता से अपनी गलती स्‍वीकार कर लेते हैं. ऐसे जातक सुलझे विचारों और प्रतिभा के धनी होने से अपना विरोध सह नहीं पाते और मुंह पर स्पष्ट बात कह देते हैं. ऐसे जातक कुछ कर गुजरने की क्षमता लिए रहते है.

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