- प्रदीप कुमार द्विवेदी  

कराग्रे वसते  लक्ष्मी, करमध्ये सरस्वती. 

करमूले पार्वतीपुत्र: प्रभाते कर दर्शनम्॥

* दीपोत्सव देवी लक्ष्मी की आराधना का सर्वोत्तम अवसर है तो इस अवसर का लाभ लेना चाहिए, लेकिन साथ ही प्रतिदिन प्रात:काल जागते ही देवी लक्ष्मी, देवी सरस्वती और पार्वतीपुत्र श्रीगणेश के दर्शन का संकल्प भी लेना चाहिए, इससे वर्षभर संतोषप्रद सुख-समृद्धि प्राप्त होती है.

* इस प्रार्थना का भावार्थ है...हथेली के आगे के भाग-अंगुलियों में देवी लक्ष्मी का निवास है, हथेली में देवी सरस्वती का निवास है तो हथेली के मूल में हमारी रक्षा करनेवाले ईष्टदेव- श्रीगणेश का निवास है, जिनके हम प्रात:काल सर्वप्रथम दर्शन करते हैं.

* अलग अलग मंत्रों में हथेली के मूल में गोविंद, ब्रह्मा आदि के नाम भी आते हैं, इनका मूल उद्देश्य हमारी सुरक्षा करनेवाले, हमारा पालन करनेवाले हमारे ईष्टदेव के दर्शन करना है. 

* देवी लक्ष्मी और श्रीगणेश की नियमित पूजा से जीवन में सुख-समृद्धि आती है.

* बुद्धि के अभाव में धन महत्वहीन है और धन के अभाव में बुद्धि व्यर्थ है इसलिए जीवन को सार्थक करने के लिए श्रीगणेश और देवी लक्ष्मी की नियमित पूजा-अर्चना करें.

* श्रीगणेश सद्बुद्धि प्रदान करनेवाले देवता हैं तो देवी लक्ष्मी सद्धन प्रदान करनेवाली देवी हैं और दोनों की आराधना से शुभ-लाभ का जीवन में प्रवेश होता है.

* श्रीगणेश समस्त देवों के प्रतिनिधि हैं तो देवी लक्ष्मी सभी माताओं की प्रतिनिधि हैं इसलिए श्रीगणेश-लक्ष्मी पूजा से समस्त देवी-देवताओं की पूजा हो जाती है.

* स्वस्थ और सुंदर मन से श्रीगणेश, देवी लक्ष्मी की आराधना करें, अगला वर्ष सुख-समृद्धि और सफलता का संदेश लेकर आएगा!

- आज का राशिफल -

निम्न राशि के लिए उत्तम चन्द्रबलम 16:32  तक:

मेष, कर्क, कन्या,
वृश्चिक, धनु, मीन

*कुम्भ राशि में जन्में लोगो के लिए अष्टम चन्द्र

उसके पश्चात -

निम्न राशि के लिए उत्तम चन्द्रबलम अगले दिन सूर्योदय तक:

मेष, वृषभ, सिंह,
तुला, धनु, मकर

*मीन राशि में जन्में लोगो के लिए अष्टम चन्द्र  

* यहां राशिफल चन्द्र के गोचर पर आधारित है, व्यक्तिगत जन्म के ग्रह और अन्य ग्रहों के गोचर के कारण शुभाशुभ परिणामों में कमी-वृद्धि संभव है, इसलिए अच्छे समय का सद्उपयोग करें और खराब समय में सतर्क रहें.

 - रविवार का चौघडिय़ा -

दिन का चौघडिय़ा       रात्रि का चौघडिय़ा

पहला- उद्वेग             पहला- शुभ

दूसरा- चर               दूसरा- अमृत

तीसरा- लाभ              तीसरा- चर

चौथा- अमृत              चौथा- रोग

पांचवां- काल             पांचवां- काल

छठा- शुभ                छठा- लाभ

सातवां- रोग             सातवां- उद्वेग

आठवां- उद्वेग            आठवां- शुभ

* चौघडिय़ा का उपयोग कोई नया कार्य शुरू करने के लिए शुभ समय देखने के लिए किया जाता है. 

* दिन का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* रात का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* अमृत, शुभ, लाभ और चर, इन चार चौघडिय़ाओं को अच्छा माना जाता है और शेष तीन चौघडिय़ाओं- रोग, काल और उद्वेग, को उपयुक्त नहीं माना जाता है.

* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, स्थानीय पंरपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं.

* अपने ज्ञान के प्रदर्शन एवं दूसरे के ज्ञान की परीक्षा में समय व्यर्थ गंवाएं क्योंकि ज्ञान अनंत है और जीवन का अंत है

पंचांग

रविवार, 27 अक्टूबर 2019

दीपावली

लक्ष्मी पूजा

केदार गौरी व्रत

चोपड़ा पूजा

शारदा पूजा

काली पूजा

कमला जयन्ती

दर्श अमावस्या

शक सम्वत 1941 विकारी

विक्रम सम्वत 2076

काली सम्वत 5121

दिन काल 11:11:19

मास कार्तिक

तिथि चतुर्दशी - 12:25:25 तक

नक्षत्र चित्रा - 27:17:20 तक

करण शकुन - 12:25:25 तक, चतुष्पाद - 22:46:23 तक

पक्ष कृष्ण

योग विश्कुम्भ - 22:09:22 तक

सूर्योदय 06:29:14

सूर्यास्त 17:40:34

चन्द्र राशि कन्या - 16:32:17 तक

चन्द्रोदय 30:22:00

चन्द्रास्त 17:25:00

ऋतु हेमंत

दिशा शूल: पश्चिम में

राहु काल वास: उत्तर में

नक्षत्र शूल: कोई नहीं

चन्द्र वास: दक्षिण में 16:32 तक,पश्चिम में 16:32 से

आज का दिन : ज्योतिष की नज़र में


जानिए कैसा रहेगा आपका भविष्य


खबर : चर्चा में


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