- प्रदीप कुमार द्विवेदी  

* हर महीने में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है.

* धर्मग्रंथों में शिवरात्रि का विशेष महत्व बताया गया है तथा यह शिवोपासना का सर्वोत्तम अवसर माना जाता है.

* धर्मग्रंथों के अनुसार देवी लक्ष्मी, सरस्वती, गायत्री, सावित्री, सीता, पार्वती आदि देवियों ने शिवरात्रि व्रत किया था.

* महाशिवरात्रि की मध्य रात्रि में भगवान भोलेनाथ लिङ्ग स्वरूप प्रकट हुए थे और पहली बार शिव लिङ्ग की पूजा भगवान श्रीविष्णु और श्रीब्रह्मा ने की थी. 

* तब से महाशिवरात्रि, भगवान भोलेनाथ के प्रकटोत्सव स्वरूप मनाया जाता है तथा श्रद्धालु प्रतिमाह मासिक शिवरात्रि का व्रत करते हैं और भोलेनाथ की पूजा-अर्चना करते हैं.

* शिवरात्रि पर पूजा-व्रत से आध्यात्मिक प्रकाश की प्राप्ति होती है.

* भोलेनाथ सच्चे मन से की गई पूजा से प्रसन्न होते हैं इसलिए दिल से प्रार्थना करें...

कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्.

सदा वसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि..

भावार्थ... जो कर्पूर जैसे गौर वर्ण वाले हैं, करुणा के अवतार हैं, संसार के सार हैं और भुजंगों का हार धारण करते हैं, वे भगवान भोलेनाथ, माता भवानी सहित मेरे हृदय में सदैव निवास करें, उन्हें मेरा नमन है.

- आज का राशिफल -

  निम्न राशि के लिए उत्तम चन्द्रबलम अगले दिन सूर्योदय तक:

मेष, कर्क, कन्या,

वृश्चिक, धनु, मीन

*कुम्भ राशि में जन्में लोगो के लिए अष्टम चन्द्र  

*यहां राशिफल चन्द्र के गोचर पर आधारित है, व्यक्तिगत जन्म के ग्रह और अन्य ग्रहों के गोचर के कारण शुभाशुभ परिणामों में कमी-वृद्धि संभव है, इसलिए अच्छे समय का सद्उपयोग करें और खराब समय में सतर्क रहें.

 शनिवार का चौघडिय़ा 

दिन का चौघडिय़ा       रात्रि का चौघडिय़ा

पहला- काल              पहला- लाभ

दूसरा- शुभ              दूसरा- उद्वेग

तीसरा- रोग              तीसरा- शुभ

चौथा- उद्वेग             चौथा- अमृ

पांचवां- चर               पांचवां- चर

छठा- लाभ                छठा- रोग

सातवां- अमृत            सातवां- काल

आठवां- काल             आठवां- लाभ

* चौघडिय़ा का उपयोग कोई नया कार्य शुरू करने के लिए शुभ समय देखने के लिए किया जाता है 

* दिन का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* रात का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* अमृत, शुभ, लाभ और चर, इन चार चौघडिय़ाओं को अच्छा माना जाता है और शेष तीन चौघडिय़ाओं- रोग, काल और उद्वेग, को उपयुक्त नहीं माना जाता है.

* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, स्थानीय पंरपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं.

* अपने ज्ञान के प्रदर्शन एवं दूसरे के ज्ञान की परीक्षा में समय व्यर्थ गंवाएं क्योंकि ज्ञान अनंत है और जीवन का अंत है! 

पंचांग 

शनिवार, 26 अक्टूबर 2019

काली चौदस

हनुमान पूजा

मासिक शिवरात्रि

शक सम्वत 1941   विकारी

विक्रम सम्वत 2076

काली सम्वत 5121

दिन काल 11:12:53

मास कार्तिक

तिथि त्रयोदशी - 15:48:42 तक

नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी - 08:27:51 तक, हस्त - 29:49:55 तक

करण वणिज - 15:48:42 तक, विष्टि - 26:06:38 तक

पक्ष कृष्ण

योग वैधृति - 26:04:28 तक

सूर्योदय 06:28:34

सूर्यास्त 17:41:28

चन्द्र राशि कन्या

चन्द्रोदय 29:15:59

चन्द्रास्त 16:45:00

ऋतु हेमंत

दिशा शूल: पूर्व में

राहु काल वास: पूर्व में

नक्षत्र शूल: उत्तर में 08:28 तक

चन्द्र वास: दक्षिण में

आज का दिन : ज्योतिष की नज़र में


जानिए कैसा रहेगा आपका भविष्य


खबर : चर्चा में


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