अभिमनोज. हरियाणा विधानसभा चुनाव से पहले पल पल इंडिया ने लिखा था.... हरियाणा में बीजेपी के लिए चुनौती? कांग्रेस के लिए अवसर! इस अभिमत में यह साफ था कि हरियाणा विधानसभा चुनाव में बीजेपी के लिए सत्ता में आना मुश्किल, तो कांग्रेस के लिए भी सत्ता हांसिल करना आसान नहीं है! जाहिर है, हरियाणा में भारतीय जनता पार्टी सबसे बड़े दल के रूप में उभरकर सत्ता के करीब तो पहुंच गई, लेकिन अब सरकार बनाना और चलाना इतना आसान नहीं है. बीजेपी वैसा प्रदर्शन नहीं कर पाई जैसी तैयारी थी....

अबकी बार 75 पार? अबकी बार तो बहुमत के भी इस पार! अलबत्ता, कांग्रेस का प्रदर्शन, कांग्रेस मुक्त भारत का सपना देखने वालों के लिए किसी झटके से कम नहीं है? उधर, जजपा नेता दुष्यंत चौटाला ने घरेलु सियासी मैदान में अपनी जीत दर्ज करवा दी है, अब वे किंगमेकर की भूमिका में हैं? हो सकता है पहले मैं, पहले मैं के चक्कर में हरियाणा की सत्ता कांग्रेस-जजपा के हाथ से निकल जाए, पर संख्याबल के दम पर बीजेपी के लिए सरकार बनाने की संभावना प्रबल हो गई है, यह बात अलग है कि हरियाणा की कर्नाटकी तस्वीर को संभालना अब बीजेपी के लिए भी आसान नहीं है? बीजेपी ने कई स्टार चेहरों पर भी दांव लगाया था, लेकिन उनके सियासी सितारे अस्त हो गए!

इस बार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को तो लोकसभा चुनाव के करीब ही मत प्रतिशत मिला है, किन्तु बीजेपी अपने मतदाताओं को नहीं संभाल पाई है? कहां लोकसभा चुनाव में 79 विधानसभा क्षेत्रों में बीजेपी आगे थी और कहां अब 40 सीटों पर आ गई है! हरियाणा विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 40, तो कांग्रेस को 31 सीटें मिली हैं, चुनाव जीतने वाले सात निर्दलियों में से पांच बीजेपी के ही बागी हैं और गोपाल कांडा भी बीजेपी से हाथ मिला सकते हैं, लिहाजा बीजेपी के लिए सरकार बनाने की उम्मीदें तो हंै, लेकिन राजनीति क्या रंग दिखा दे? कह नहीं सकते!

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