- प्रदीप लक्ष्मीनारायण द्विवेदी (9772354346)    

*गोवत्स द्वादशी के अवसर पर गौमाता और उसके बछड़े का दर्शन और पूजन करना शुभ माना जाता है. 

*धर्मधारण है कि... इस दिन भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद पहली बार यशोदा मइया ने गौमाता का दर्शन और पूजन किया था. 

*गोवत्स द्वादशी को लेकर अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग कथाएं और मान्यताएं हैं लेकिन मूल उद्देश्य गाय-बछड़े की पूजा है इसलिए सच्चे मन से गाय-बछड़े की सेवा-पूजा करें और समस्त देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त करें.

*पूजा के पश्चात गौमाता के चरणों की धूल माथे पर लगाएं और परिवार की सुख-समृद्धि-सफलता के लिए प्रार्थना करें.

*इस दिन गाय के दूध के सेवन से बचें. 

आज का राशिफल -

निम्न राशि के लिए उत्तम चन्द्रबलम 16:24 तक:

मिथुन, सिंह, तुला,
वृश्चिक, कुम्भ, मीन

*मकर राशि में जन्में लोगो के लिए अष्टम चन्द्र

उसके पश्चात -

निम्न राशि के लिए उत्तम चन्द्रबलम अगले दिन सूर्योदय तक:

मेष, कर्क, कन्या,
वृश्चिक, धनु, मीन

*कुम्भ राशि में जन्में लोगो के लिए अष्टम चन्द्र

* यहां राशिफल चन्द्र के गोचर पर आधारित है, व्यक्तिगत जन्म के ग्रह और अन्य ग्रहों के गोचर के कारण शुभाशुभ परिणामों में कमी-वृद्धि संभव है, इसलिए अच्छे समय का सद्उपयोग करें और खराब समय में सतर्क रहें.

शुक्रवार का चौघडिय़ा -

दिन का चौघडिय़ा      रात्रि का चौघडिय़ा

पहला- चर              पहला- रोग

दूसरा- लाभ             दूसरा- काल

तीसरा- अमृत           तीसरा- लाभ

चौथा- काल            चौथा- उद्वेग

पांचवां- शुभ            पांचवां- शुभ

छठा- रोग              छठा- अमृत

सातवां- उद्वेग          सातवां- चर

आठवां- चर            आठवां- रोग

* चौघडिय़ा का उपयोग कोई नया कार्य शुरू करने के लिए शुभ समय देखने के लिए किया जाता है 

* दिन का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* रात का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* अमृत, शुभ, लाभ और चर, इन चार चौघडिय़ाओं को अच्छा माना जाता है और शेष तीन चौघडिय़ाओं- रोग, काल और उद्वेग, को उपयुक्त नहीं माना जाता है.

* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, स्थानीय पंरपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं.

* अपने ज्ञान के प्रदर्शन एवं दूसरे के ज्ञान की परीक्षा में समय व्यर्थ न गंवाएं क्योंकि ज्ञान अनंत है और जीवन का अंत है!

पंचांग

शुक्रवार, 25 अक्टूबर 2019

गोवत्स द्वादशी

धन तेरस

यम पञ्चक प्रारम्भ

यम दीपम

प्रदोष व्रत

शक सम्वत 1941 विकारी

विक्रम सम्वत 2076

काली सम्वत 5121

दिन काल 11:14:25

मास कार्तिक

तिथि द्वादशी - 19:10:19 तक

नक्षत्र पूर्वा फाल्गुनी - 11:00:29 तक

करण कौलव - 08:47:25 तक, तैतिल - 19:10:19 तक

पक्ष कृष्ण

योग ब्रह्म - 09:54:54 तक, एन्द्र - 30:02:22 तक

सूर्योदय 06:27:54

सूर्यास्त 17:42:20

चन्द्र राशि सिंह - 16:23:22 तक

चन्द्रोदय 28:08:59

चन्द्रास्त 16:06:00

ऋतु हेमंत

दिशा शूल: पश्चिम में

राहु काल वास: दक्षिण-पूर्व में

नक्षत्र शूल: उत्तर में 11:01 से

चन्द्र वास: पूर्व में 16:24 तक, दक्षिण में 16:24 से

आज का दिन : ज्योतिष की नज़र में


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