पलपल संवाददाता, जबलपुर. केंद्र सरकार व रेल मंत्रालय द्वारा रेलवे में तेजी से किये जा रहे निजीकरण के खिलाफ पूरे देश के रेल कर्मचारी उबाल पर हैं. इसी के तहत आज बुधवार 23 अक्टूबर को जबलपुर में वेस्ट सेंट्रल रेलवे एम्पलाइज यूनियन (डबलूसीआरईयू) के तत्वावधान में जबर्दस्त रैली निकाली गई. इस रैली में सैकड़ों रेल कर्मचारी सड़क पर उतरे और रैली निकालकर, निजीकरण का पुतला दहन किया गया. यूनियन ने केंद्र सरकार को चेताया है कि यदि निजी हाथों में ट्रेनों व स्टेशनों को सौंपने का निर्णय वापस नहीं लिया जाता है तो रेल का चक्का जाम कर दिया जायेगा.

डबलूसीआरईयू रैली

निजीकरण के विरोध में डबलूसीआरईयू द्वारा आज 23 अक्टूबर को दोपहर 12.00 बजे रेलवे स्टेशन जबलपुर के प्लेटफार्म नंबर एक के बाहर से एक विरोध रैली निकाली गयी, जो पुल नम्बर 01 के बाहर से आरम्भ होकर, इंदिरा मार्के, जीएम आफिस, प्लेटफार्म नंबर 06 के बाहर तरफ से होते हुए डीआरएम आफिस में आमसभा में तब्दील हुई, जहां ृपर निजीकरण का पुतला दहन किया गया.

डबलूसीआरईयू रैली

रैली में स्वस्फूर्त शामिल हुई महिलाएं, युवा व अन्य रेलकर्मचारी

इस रैली की खास बात यह थी कि निजीकरण के खिलाफ कर्मचारियों में इतना अधिक गुस्सा नजर आया कि डबलूसीआरईयू के इस आंदोलन में स्व-स्फूर्त रेल कर्मचारी, जिसमें महिलाएं, युवा व सभी वर्ग के कर्मचारी शामिल थे, बढ़-चढ़कर शामिल हुए. पूरे रैली मार्ग पर लाल झंडा ही झंडा नजर आ रहा था और इन कर्मचारियों के हाथों में निजीकरण के खिलाफ लिखे गये नारों की पट्टिकाएं थी. इस रैली के मुख्य मार्ग से गुजरते समय आम नागरिक भी बड़ी उत्सुकता से देख रहे थे और केंद्र की निजीकरण की नीति से आक्रोशित नजर आए.

डबलूसीआरईयू रैली

अब आर-पार की लड़ाई तय

इस मौके पर यूनियन के मंडल सचिव नवीन लिटोरिया व मंडल अध्यक्ष बीएन शुक्ला ने कहा कि रेलवे के लिए यह समय काफी संकटपूर्ण है. सरकार निजीकरण को लगातार बढ़ावा दे रही है. ट्रेक रेलवे का, इंजिन, कोचेस, सिग्नल, प्लेटफार्म सब रेलवे का, लेकिन ट्रेन को चलाकर जो कमाई होगी, वह प्राइवेट कंपनियों की जेब में जायेगी. एआईआरएफ/डबलूसीआरईयू इसे बर्दाश्त नहीं करेगी. भारत की लाइफ लाइन रेलवे को बचाने के लिए संघर्ष को किसी भी हद तक ले जाया जायेगा. जरूरत पड़ी तो रेल का चक्का जाम करने से भी कर्मचारी पीछे नहीं हटेंगे. यूनियन पदाधिकारियों ने कहा कि अब देश और रेलवे के लोगों के लिए समय आ गया है कि वे गरीब आदमी के ट्रांसपोर्ट सिस्टम, यानी भारतीय रेलवे को कॉर्पोरेट दिग्गजों के चंगुल से बचाएं, जिसका उद्देश्य रेलवे की संपत्ति के हजारों करोड़ रुपये लूटना है.

डबलूसीआरईयू रैली

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