महान दार्शनिक और मार्क्सवाद के प्रवर्तक कार्ल मार्क्स ने एक बार कहा था 'लोग अपना इतिहास खुद बनाते हैं, लेकिन इतिहास कभी उनकी पसंद से नहीं बनता'. यह बात रोमानिया के तानाशाह रहे निकोलय चाचेस्कू पर बिल्कुल फिट बैठती है. चाचेस्कू ने लगातार 25 सालों तक देश पर राज किया और ऐसा किया कि उनके डर से न लोग कुछ बोलते थे और न ही वहां की मीडिया. उन्होंने अपना इतिहास बनाने की कोशिश तो की, लेकिन आज रोमानिया का इतिहास ही उनको पसंद नहीं करता. 

वैसे तो दुनिया में कई तानाशाह हुए हैं, लेकिन निकोलस चाचेस्कू जैसा कोई नहीं हुआ. कहा जाता है कि 60-70 के दशक में चाचेस्कू ने आम लोगों की भी निगरानी में अपनी खुफिया पुलिस लगी रखी थी, यह जानने के लिए कि लोग अपनी निजी जिंदगी में क्या कर रहे हैं. 

बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रोमानिया में भारत के राजदूत रह चुके राजीव डोगरा ने बताया कि चाचेस्कू के जमाने में पार्क में बैठे लोगों पर नजर रखने के लिए एक खुफिया एजेंट बैठा रहता था. इसका पता लोगों को न चले, इसलिए वो अखबार में किए एक छेद के सहारे लोगों को देखा करता था. 

राजीव डोगरा के मुताबिक, चाचेस्कू की मौत के 10 साल बाद भी रोमानिया में लोग डर के साये में जीते थे. वह अपनी परछाई से भी घबराते थे और सड़क पर चलते समय बार-बार पीछे मुड़कर देखा करते थे कि कहीं कोई जासूस उनका पीछा तो नहीं कर रहा. 

बीबीसी के मुताबिक, रोमानिया में लोग चाचेस्कू को 'कंडूकेडर' के नाम से जानते थे, जिसका मतलब होता था 'नेता', जबकि उनकी पत्नी एलीना को रोमानिया की राष्ट्रमाता का खिताब दिया गया था. कहते हैं कि तानाशाही का आलम ये हो गया था कि जब कोई दो टीमों के बीच फुटबॉल मैच होता था तो एलीना यह तय करती थीं कि जीत किस टीम की होगी और वो मैच टीवी पर प्रसारित किया जाएगा या नहीं.  

कहते हैं कि चाचेस्कू ने पूरे देश में गर्भपात पर प्रतिबंध लगा दिया था और इसके पीछे उद्देश्य ये था कि वह रोमानिया की जनसंख्या को बढ़ाना चाहते थे, ताकि वह अपने देश को एक विश्व शक्ति बना सकें. हालांकि उन्होंने तलाक पर प्रतिबंध तो नहीं लगाया था, लेकिन उसे इतना मुश्किल बना दिया था कि लोग तलाक ले-दे ही नहीं पाते थे. 

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