प्रदीप द्विवेदी. पीएमसी बैंक घोटाले के बाद इंदौर की बेटी फेमस एक्ट्रेस माधुरी संजीव का बड़ा सवाल है कि किस बैंक पर भरोसा करें? वे कहतीं हैं कि- इतना बड़ा दीपावली का त्योहार है, ऐसे में क्या करें? सरकार की जिम्मेदारी है, हमारा अपना ही पैसा ब्लाक हो गया है, मैं इस वक्त इतनी अकेली और असहाय महसूस कर रही हूं, लेकिन अपनी तकलीफ किसे बताउं?

इधर, खबर है कि.... रिजर्व बैंक के अधिकारियों की पीएमसी बैंक खाताधारकों के डेलिगेशन के साथ हुई बैठक किसी खास नतीजे के बगैर खत्म हो गई है! आरबीआई के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर ने पीएमसी मामले पर 30 अक्टूबर तक का समय मांगा है. 30 अक्टूबर को आरबीआई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताएगा कि पीएमसी बैंक पर उसने क्या फैसला लिया है? अब, आरबीआई की पीएमसी बैंक के मामले को लेकर 25 अक्टूबर को मीटिंग होगी जिसमें फैसला लिया जाएगा, जिसके बारे में 30 अक्टूबर को जानकारी दी जाएगी.

जाहिर है, दीपावली के त्योहार तक पीएमसी बैंक के खाताधारकों को कोई खास राहत नहीं मिलने जा रही है.

पीएमसी बैंक घोटाले के कारण आम खाताधारक ही नहीं, बाॅलीवुड से जुड़े अनेक लोग प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हुए हैं.

माधुरी संजीव का इस परेशानी की शुरूआत के बारे में कहना हैं कि हमने मार्निंग में पढ़ा कि आरबीआई ने इतना बड़ा कदम उठाया है और पीएमसी को बंद कर दिया है. केवल 1000 रुपए निकाले जा सकते हैं, हंगामा हुआ तो पहले 5-10 हजार और अब 40 हजार लिमिट हो गई. हालत यह है कि हम अपना ही पैसा नहीं निकाल पा रहे हैं. दीपावली का इतना बड़ा फेस्टिवल है, जिसमें आपका स्टाफ आपकी तरफ देखता है, और भी कई तरह के खर्चे हैं, तो आप सारी चीजें कहां से एर्जस्ट करेंगे?

मेरा बेटा अभी सिंगापुर में हैं, जो सबसे महंगी कंट्री है, मैं उससे तो नहीं कह सकती कि पैसे भेजो! फिर भी उसने पैसे भेजे, मैं अपनी ही कंट्री में परेशान हूं, मैं अपने बेटे को दूसरी कंट्री में कैसे परेशान करूं?

मायानगरी की बात करते हुए वे कहती हैं कि हम जो टीवी में काम करते हैं, उसमें फोर मंथ का क्रेडिट होता है. चौथे-पांचवें महिने में पेमेंट मिलनी शुरू होती है. हम चार महिने का खर्च कर चुके होते हैं, आपका पेट्रोल, ड्राइवर, शूटिंग आदि का खर्चा होता है और आपको अचानक पता चलता है कि आप बैंक से अपना ही पैसा नहीं निकाल सकते हैं, तो क्या करें? आज कैश कौन रखता है? अब हम क्या करें? दस एकाउंट तो हैं नहीं, कालाबाजारी तो करते नहीं हैं, सारी मनी व्हाइट में आती है, चैक से आती है, कैश तो आता नहीं है, पहले पांच महिने का क्रेडिट देें, अपना ही पैसा निकालने के लिए टैक्स दें? अभी आपने सुना होगा कि बैंक में 40 ट्रांजिक्शन के बाद इतना चार्जेज लगाएंगे? इससे तो कालाबाजारी शुरू हो जाएगी? लोग कैश रखेंगे! कौनसे बैंक पर इंसान भरोसा करे?

मैं तो सिर्फ यह कहना चाहती हूं कि जिन लोगों ने गबन किया है, उनको पकड़िए, कार्रवाई करें, लेकिन जिन बैंक ग्राहकों का एकाउंट है, उनको तो पैसा निकालने दें!

हम लोगों में कितना आक्रोश भर चुका है, इंसान क्या करेगा? किसको बोलेगा? और फिल्ड की बात नहीं जानती, लेकिन कलाकार का बाॅलीवुड में, बड़ी सिटी में नेम-फेम तो हो जाता है, लेकिन इसे प्रोफेशन नहीं मानते हैं, यह अनस्टेबल प्रोफेशन है. मैं एमपी, इंदौर से बिलांग करती हूं. आज की हालत में भावनात्मक तौर से, मानसिक तौर से अपने आप से लड़ना पड़ रहा है, आर्थिक तंगी में स्टाफ को क्या जवाब दूं?
और ऐसी हालत में मैं अकेली नहीं हूं, बहुत परिवार हैं, सब क्या करें?

वे कहती हैं कि- सरकार की जिम्मेदारी है, आरबीआई इतने समय से क्या कर रही थी? क्या ऑडिट नहीं होती? तब सब नजर नहीं आया? रातोंरात एक्शन लेकर ऐसे बंद करवा सकते हैं? क्या हमारे पैसों से भरपाई होगी? आज, 25-30 हजार से क्या होता है? एक महिने का खर्च भी चलता है, क्या?

वे कहती हैं कि ऐसी व्यवस्था हो कि अपने एकाउंट से जितना पैसा चाहे निकाल सकें, आखिर आपका एकाउंट है, आपका पैसा है!

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