* भगवान भोलेनाथ जिस दिन भैरव के रूप में प्रकट हुए थे, उसे कालभैरव जयन्ती पुकारा जाता है और कृष्ण पक्ष की हर अष्टमी तिथि के दौरान इसे मनाया जाता है जिसे कालाष्टमी कहते हैं.

* इस अवसर पर कालभैरव की पूजा-अर्चना से जीवन के समस्त कष्ट, नष्ट होते हैं, आकस्मिक दुर्घटनाओं से रक्षा होती है और दुष्टजनों से मुक्ति मिलती है.

* काली माता के भक्त इस दिन काल भैरव के साथ-साथ देवी कालिका की पूजा-अर्चना-व्रत भी करते हैं. भैरव पूजा-आराधना करने से परिवार में सुख-समृद्धि के साथ-साथ स्वास्थ्य रक्षा और अकाल मौत से सुरक्षा भी होती है. 

* इस दिन काल भैरव के दर्शन-पूजा मात्र से अशुभ कर्मों से मुक्ति  मिलती है, क्रूर और अकारक ग्रहों के कुप्रभाव से छुटकारा मिलता है. 

* इस अवसर पर रात्रि जागरण करके शिव परिवार की कथा सुननी चाहिए और भजन-कीर्तन करना चाहिए. 

* काल भैरव कथा का श्रवण और आरती करनी चाहिए. 

* काल भैरव की प्रसन्नता के लिए उनके वाहन श्वान... कुत्ते को भोजन कराना चाहिए. 

* इस दिन प्रात:काल पवित्र नदी-सरोवर में स्नान करके पितरों को श्रद्धांजलि देने से समस्त विघ्न समाप्त हो जाते हैं. 

* काल भैरव आराधना से अकाल मृत्यु से रक्षा होकर स्वस्थ दीर्घायु प्राप्त होती है.

- आज का राशिफल -

निम्न राशि के लिए उत्तम चन्द्रबलम 11:41 तक:

मेष, मिथुन, सिंह,
कन्या, धनु, मकर

*वृश्चिक राशि में जन्में लोगो के लिए अष्टम चन्द्र

उसके पश्चात -

निम्न राशि के लिए उत्तम चन्द्रबलम अगले दिन सूर्योदय तक:

वृषभ, कर्क, कन्या,
तुला, मकर, कुम्भ

*धनु राशि में जन्में लोगो के लिए अष्टम चन्द्र  

* यहां राशिफल चन्द्र के गोचर पर आधारित है, व्यक्तिगत जन्म के ग्रह और अन्य ग्रहों के गोचर के कारण शुभाशुभ परिणामों में कमी-वृद्धि संभव है, इसलिए अच्छे समय का सद्उपयोग करें और खराब समय में सतर्क रहें. 

सोमवार का चौघडिय़ा -

दिन का चौघडिय़ा      रात्रि का चौघडिय़ा

पहला- अमृत             पहला- चर

दूसरा- काल              दूसरा- रोग

तीसरा- शुभ             तीसरा- काल

चौथा- रोग              चौथा- लाभ

पांचवां- उद्वेग          पांचवां- उद्वेग

छठा- चर               छठा- शुभ

सातवां- लाभ           सातवां- अमृत

आठवां- अमृत           आठवां- चर

* चौघडिय़ा का उपयोग कोई नया कार्य शुरू करने के लिए शुभ समय देखने के लिए किया जाता है. 

* दिन का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* रात का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* अमृत, शुभ, लाभ और चर, इन चार चौघडिय़ाओं को अच्छा माना जाता है और शेष तीन चौघडिय़ाओं- रोग, काल और उद्वेग, को उपयुक्त नहीं माना जाता है.

* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, स्थानीय पंरपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं.

* अपने ज्ञान के प्रदर्शन एवं दूसरे के ज्ञान की परीक्षा में समय व्यर्थ गंवाएं क्योंकि ज्ञान अनंत है और जीवन का अंत है!   

पंचांग

सोमवार, 21 अक्टूबर 2019

अहोई अष्टमी

राधा कुण्ड स्नान

कालाष्टमी

शक सम्वत 1941 विकारी

विक्रम सम्वत 2076

काली सम्वत 5121

दिन काल 11:20:47

मास कार्तिक

तिथि सप्तमी - 06:46:54 तक, अष्टमी - 29:27:41 तक

नक्षत्र पुनर्वसु - 17:32:29 तक

करण बव - 06:46:54 तक, बालव - 18:11:32 तक

पक्ष कृष्ण

योग सिद्ध - 22:25:03 तक

सूर्योदय 06:25:18

सूर्यास्त 17:46:05

चन्द्र राशि मिथुन - 11:40:40 तक

चन्द्रोदय 23:45:59

चन्द्रास्त 13:01:59

ऋतु शरद

दिशा शूल: पूर्व में

राहु काल वास: उत्तर-पश्चिम में

नक्षत्र शूल: कोई नहीं

चन्द्र वास: पश्चिम में 11:41 तक.उत्तर में 11:41 से

आज का दिन : ज्योतिष की नज़र में


जानिए कैसा रहेगा आपका भविष्य


खबर : चर्चा में


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