नजरिया. महाराष्ट्र और हरियाणा के विधानसभा चुनाव का प्रचार अपने आखिरी चरण तक पहुंच गया है और शनिवार को चुनावी शोर खत्म हो गया, लेकिन राजनेताओं की केवल सत्ता हांसिल करने की कोशिशों को देखते हुए यह सवाल परेशान करने वाला है कि- जन समस्याओं का शोर कब थमेगा?

शुक्रवार को दोनों प्रदेशों में तमाम नेताओं की ओर से रैलियां और प्रेस कॉन्फ्रेंस करके वोट मांगे गए, किन्तु जनता के लिए क्या किया और क्या कर पाएंगे? इसका किसी के पास सही और साफ जवाब नहीं है, बस है तो यही कि हम नेक और ईमानदार है, विरोधी भ्रष्ट और बेईमान हैं! किया उन्होंने भी कुछ नहीं, कर हम भी कुछ नहीं रहे हैं?

आर्थिक मंदी गहरा रही हैं, व्यवस्थाएं बेहाल हैं, युवा बेरोजगार हैं, परन्तु कोई ठोस समाधान नहीं है? सत्ताधारियों को केवल यही चिंता है कि कहीं फिर से राजनीतिक बेरोजगार नहीं बन जाएं!

महाराष्ट्र और हरियाणा में 21 अक्टूबर को मतदान होना है और 24 अक्टूबर को नतीजे आएंगे.

खबर है कि.... चुनाव प्रचार के आखिरी दिन पीएम नरेंद्र मोदी, अमित शाह, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी आदि नेताओं ने चुनाव प्रचार किया.

बहरहाल, दोनों राज्यों में चुनाव भी हो जाएंगे, किसी को सत्ता भी मिल जाएगी, किन्तु जनता का क्या होगा? क्योंकि, किसी के भी पास जनता की वास्तविक भलाई की ठोस योजना नहीं है! सबका एक ही नजरिया है, जो हमारे साथ है वह श्रेष्ठ है और जो हमारे साथ नहीं है वह भ्रष्ट है?

आज का दिन : ज्योतिष की नज़र में


जानिए कैसा रहेगा आपका भविष्य


खबर : चर्चा में


************************************************************************************




Disclaimer : इस न्यूज़ पोर्टल को बेहतर बनाने में सहायता करें और किसी खबर या अंश मे कोई गलती हो या सूचना / तथ्य में कोई कमी हो अथवा कोई कॉपीराइट आपत्ति हो तो वह info@palpalindia.com पर सूचित करें। साथ ही साथ पूरी जानकारी तथ्य के साथ दें। जिससे आलेख को सही किया जा सके या हटाया जा सके ।