ऐस्ट्रो डायरी एक तरह का रिकार्ड है जो भविष्य की गणना के लिए भूतकाल की जरूरी जानकारियां उपलब्ध करवा सकता है.

* आमतौर पर वैकल्पिक ज्योतिष... अंक शास्त्र, लकी डे, लकी नंबर, अमावस्या/पूर्णिमा प्रभाव जैसी जानकारी व्यक्ति याद करके काम चला लेता है लेकिन यदि प्रतिदिन का रिकार्ड रखा जाए तो योग्य व्यक्ति द्वारा अनालेसेस करके कई महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाई जा सकती हैं.

* कृष्णपक्ष/शुक्लपक्ष और चन्द्र आधारित रिकार्ड/जानकारियां यह बता सकती हैं कि कौनसी तिथियां और कौनसी राशि का चन्द्र अच्छा/मध्यम/खराब प्रभाव दे रहा है.

* इसी तरह किसी ग्रह के गोचर का प्रभाव भी ऐस्ट्रो डायरी की जानकारी से पता किया जा सकता है.

* कई बार व्यक्ति विशेष के जन्म समय में फर्क होता है, ऐसे समय में एस्ट्रो रिकार्ड से समय संशोधन भी संभव है.

* एस्ट्रो डायरी के रेकार्ड से निष्कर्ष निकालना ज्योतिषी की क्षमता पर निर्भर है.

-आज का राशिफल -

 निम्न राशि के लिए उत्तम चन्द्रबलम 29:24 तक:

वृषभ, कर्क, सिंह,

वृश्चिक, धनु, मीन

*तुला राशि में जन्में लोगो के लिए अष्टम चन्द्र

उसके पश्चात -

निम्न राशि के लिए उत्तम चन्द्रबलम अगले दिन सूर्योदय तक:

मेष, मिथुन, सिंह,

कन्या, धनु, मकर

*वृश्चिक राशि में जन्में लोगो के लिए अष्टम चन्द्र

* यहां राशिफल चन्द्र के गोचर पर आधारित है, व्यक्तिगत जन्म के ग्रह और अन्य ग्रहों के गोचर के कारण शुभाशुभ परिणामों में कमी-वृद्धि संभव है, इसलिए अच्छे समय का सद्उपयोग करें और खराब समय में सतर्क रहें.

शुक्रवार का चौघडिय़ा -

दिन का चौघडिय़ा      रात्रि का चौघडिय़ा

पहला- चर              पहला- रोग

दूसरा- लाभ      दूसरा- काल

तीसरा- अमृत      तीसरा- लाभ

चौथा- काल      चौथा- उद्वेग

पांचवां- शुभ      पांचवां- शुभ

छठा- रोग             छठा- अमृत

सातवां- उद्वेग      सातवां- चर

आठवां- चर      आठवां- रोग

* चौघडिय़ा का उपयोग कोई नया कार्य शुरू करने के लिए शुभ समय देखने के लिए किया जाता है 

* दिन का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* रात का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* अमृत, शुभ, लाभ और चर, इन चार चौघडिय़ाओं को अच्छा माना जाता है और शेष तीन चौघडिय़ाओं- रोग, काल और उद्वेग, को उपयुक्त नहीं माना जाता है.

* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, स्थानीय पंरपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं.

* अपने ज्ञान के प्रदर्शन एवं दूसरे के ज्ञान की परीक्षा में समय व्यर्थ न गंवाएं क्योंकि ज्ञान अनंत है और जीवन का अंत है!

पंचांग 

शुक्रवार, 18 अक्टूबर 2019

तुला संक्रान्ति

रोहिणी व्रत

शक सम्वत 1941विकारी

विक्रम सम्वत 2076

काली सम्वत 5121

दिन काल 11:25:38

मास कार्तिक

तिथि चतुर्थी - 07:31:42 तक

नक्षत्र रोहिणी - 16:59:46 तक

करण बालव - 07:31:42 तक, कौलव - 19:42:34 तक

पक्ष कृष्ण

योग वरियान - 27:21:13 तक

सूर्योदय 06:23:24

सूर्यास्त17:49:03

चन्द्र राशि वृषभ - 29:23:51 तक

चन्द्रोदय 21:00:00

चन्द्रास्त 10:11:59

ऋतु शरद

दिशा शूल: पश्चिम में

राहु काल वास: दक्षिण-पूर्व में

नक्षत्र शूल: पश्चिम में 17:00 तक

चन्द्र वास: दक्षिण में 29:24 तक, पश्चिम में  29:24 से

आज का दिन : ज्योतिष की नज़र में


जानिए कैसा रहेगा आपका भविष्य


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