* करवा चौथ का व्रत कृष्ण पक्ष की दीपावली से पहले आनेवाली चतुर्थी के दौरान किया जाता है. 

* करवा चौथ के दिन ही संकष्टी चतुर्थी भी होती है जब श्रीगणेश की पूजा-उपासना करते हैं एवं व्रत रखते हैं. 

* विवाहित महिलाएं पति की सुखद-स्वस्थ दीर्घायु के लिए करवा चौथ का व्रत और इसकी रस्मों को संपूर्ण निष्ठा से करती हैं. 

* महिलाएं- श्रीगणेश, भोलेनाथ, माता पार्वती, कार्तिकेय सहित संपूर्ण शिव परिवार की पूजा-अर्चना करती हैं. 

* महिलाएं अपना व्रत, चन्द्रमा के दर्शन और उनको अर्घ अर्पण करने के पश्चात ही छोड़ती हैं. 

* करवा चौथ का व्रत कठोर तपस्या की तरह है जिसमें सूर्योदय से लेकर रात में चन्द्र-दर्शन तक महिलाएं अन्न-जल ग्रहण नहीं करती हैं, इसलिए संपूर्ण परिवार को उन्हें सम्मान और सहयोग प्रदान करना चाहिए. 

* करवा चौथ को करक चतुर्थी भी पुकारते हैं. 

* करवा/करक मिट्टी का पात्र होता है जिससे चन्द्रदेव को जल अर्पण किया जाता है. 

* इस व्रत-पूजा में- करवा, का विशेष महत्व है जो किसी सम्माननीय महिला/ प्रतिष्ठित ब्राह्मण को प्रदान किया जाता है. 

- आज का राशिफल -

निम्न राशि के लिए उत्तम चन्द्रबलम अगले दिन सूर्योदय तक:

वृषभ, कर्क, सिंह,
वृश्चिक, धनु, मीन

*तुला राशि में जन्में लोगो के लिए अष्टम चन्द्र  

* यहां राशिफल चन्द्र के गोचर पर आधारित है, व्यक्तिगत जन्म के ग्रह और अन्य ग्रहों के गोचर के कारण शुभाशुभ परिणामों में कमी-वृद्धि संभव है, इसलिए अच्छे समय का सद्उपयोग करें और खराब समय में सतर्क रहें.

गुरुवार का चौघडिय़ा -

दिन का चौघडिय़ा      रात्रि का चौघडिय़ा

पहला- शुभ             पहला- अमृत

दूसरा- रोग              दूसरा- चर

तीसरा- उद्वेग          तीसरा- रोग

चौथा- चर             चौथा- काल

पांचवां- लाभ           पांचवां- लाभ

छठा- अमृत           छठा- उद्वेग

सातवां- काल          सातवां- शुभ

आठवां- शुभ          आठवां- अमृत

* चौघडिय़ा का उपयोग कोई नया कार्य शुरू करने के लिए शुभ समय देखने के लिए किया जाता है 

* दिन का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* रात का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* अमृत, शुभ, लाभ और चर, इन चार चौघडिय़ाओं को अच्छा माना जाता है और शेष तीन चौघडिय़ाओं- रोग, काल और उद्वेग, को उपयुक्त नहीं माना जाता है.

* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, स्थानीय पंरपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं.

* अपने ज्ञान के प्रदर्शन एवं दूसरे के ज्ञान की परीक्षा में समय व्यर्थ गंवाएं क्योंकि ज्ञान अनंत है और जीवन का अंत है! 

- पंचांग -

गुरुवार, 17 अक्टूबर 2019

करवा चौथ

संकष्टी चतुर्थी

शक सम्वत 1941विकारी

विक्रम सम्वत 2076

काली सम्वत 5121

दिन काल 11:27:15

मास कार्तिक

तिथि तृतीया - 06:51:05 तक

नक्षत्र कृत्तिका - 15:52:21 तक

करण विष्टि - 06:51:05 तक, बव - 19:14:25 तक

पक्ष कृष्ण

योग व्यतीपात - 28:12:38 तक

सूर्योदय 06:22:47

सूर्यास्त 17:50:03

चन्द्र राशि वृषभ

चन्द्रोदय 20:15:59

चन्द्रास्त 09:13:59

ऋतु शरद

दिशा शूल: दक्षिण में

राहु काल वास: दक्षिण में

नक्षत्र शूल: पश्चिम में 15:53 से

चन्द्र वास: दक्षिण में

आज का दिन : ज्योतिष की नज़र में


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