नई दिल्ली. रेलवे को निजीकरण करने की दिशा में रेल मंत्रालय ने विभिन्न विभागों में कार्यरत कर्मचारियों की आवश्यकता का नए सिरे से आकलन कर नॉन-कोर गतिविधियों को आउटसोर्स करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है. इसके तहत रेलवे के लगभग 3 लाख कर्मचारियों पर नौकरी से निकाले जाने की तलवार लटक रही है.

एक हिंदी वेबसाईट में छपी रिपोर्ट के मुताबिक रेलवे बोर्ड की ओर से विभिन्न कार्यो के लिए कर्मचारियों की आवश्यकता के नए मानदंड निर्धारित किए जा रहे हैं. अधिकारियों से कहा गया है कि वे नए मानकों के मुताबिक हर विभाग में विभिन्न कार्यो के लिए आवश्यक कर्मचारियों की संख्या का नए सिरे से आकलन करें और इस बात का पता लगाएं कि किस विभाग के कितने कार्यों को आउटसोर्स किया जा सकता है, ताकि रेलवे को फालतू सरकारी कर्मचारियों के बोझ से छुटकारा दिलाया जा सके और वेतन सहित अन्य खर्चो में कमी की जा सके.

इन विभागों के काम पर खास नज

रिपोर्ट के अनुसार रेलवे के जिन विभागों के कार्यों का आकलन करने के लिए कहा गया है, उसमें ओएचई नॉन पावर ब्लॉक, ओएचई के अन्य कार्य, पीएसआइ मेंटीनेंस एवं पीएसआइ आपरेशन तथा टीपीसी, ड्राइंग तथा तकनीकी एवं क्लेरिकल स्टाफ व हेल्पर के कार्य जैसे शामिल हैं. कोर गतिविधियों में भी नए मानकों के अनुसार इलेक्ट्रिक लोको तथा कोच के मेंटीनेंस के लिए इलेक्ट्रिक एवं मैकेनिकल कर्मचारियों की संख्या भी अब पहले से कम होगी. रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि रेल मंत्रालय ने विभिन्न विभागों में कर्मचारियों का नए सिरे से आकलन कर कर्मचारियों में कमी करने तथा गैर-कोर गतिविधियों को आउटसोर्स करने को कहा गया है, जिसके बाद कर्मचारियों के पुनराकलन की ये मुहिम सरकार के उस आदेश के बाद शुरू हुई है.

लोकसभा में सरकार रेलकर्मियों की संख्या 10 लाख करने की बात कह चुकी

उल्लेखनीय है कि पूर्व में केद्र सरकार ने लोकसभा में एक प्रश्न के जवाब देते हुए कहा है कि रेलवे में 13 लाख कर्मचारी हैं और सरकार इनकी संख्या को घटाकर 10 लाख करना चाहती है. इसके लिए 2014 से 2019 के बीच ग्रुप ए तथा ग्रुप बी के 1.19 लाख अधिकारियों के कामकाज, शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य, हाजिरी तथा समयपालन की समीक्षा की गई है. सेवा नियमावली की प्रीमेच्योर रिटायरमेंट क्लॉज के तहत प्रदत्त अधिकारों का उपयोग करते हुए इनमें से अक्षम अधिकारियों को समय से पहले रिटायर करने का निर्णय लिया गया है.

सरकार का मानना है कि यदि भारतीय रेल को जापान और चीन से मुकाबला करना है तथा जनता को विश्वस्तरीय और हाईस्पीड सेवाएं प्रदान करनी है तो उसे कुशल और प्रतिस्पर्धी बनना होगा. रिपोर्ट में कहा गया है कि वही कार्य निजी कंपनियों को सौंप दिये जाएं, जिनका सीधा संबंध ट्रेन आपरेशन से नहीं है. इंजन, वैगन और डिब्बों का निर्माण, पार्सल, स्टेशनों, कालोनियों, अस्पतालों तथा स्कूलों का प्रबंधन एवं रखरखाव जैसे अनेक कार्य इसी श्रेणी में आते हैं.

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