- प्रदीप कुमार द्विवेदी  

जीवन में ऐसे कई अवसर आते हैं जब हमारे अपने ही हमारी राह में बाधा बन जाते हैं, ऐसा तब होता है जब उस संबंधी से संबंधित ग्रह अनुकूल नहीं हो! अनेक व्यक्तियों को अक्सर अपने ही लोगों के कार्यों से परेशानी होती है. कोई अपने भाई के कार्य से दुखी है तो कोई बेटे से, किसी को पत्नी से परेशानी है तो किसी को पति से, ऐसी तमाम समस्याओं से राहत मिल सकती है यदि संबंधित देव की पूजा-अर्चना की जाए... 

* पिता के कारण परेशानी- सूर्य ग्रह के अकारक होने पर पिता से विरोधाभास या वैचारिक मतभेद हो सकता है. अत: सूर्योपासना द्वारा इस स्थिति से बचा जा सकता है.

* माता के कारण परेशानी- चंद्र की प्रतिकूलता के कारण माता से कष्ट संभव है. भगवान शिव की पूजा-आराधना से कष्ट मुक्ति संभव है.

* पत्नी के कारण परेशानीयदि पत्नी से अनबन है, वैचारिक मतभेद है तो ऐसा शुक्र ग्रह के कारण हो सकता है. देवी लक्ष्मी की उपासना से ऐसे मामलों में राहत मिलती है.

* पति/बुजुर्गों से कष्ट- सामाजिक परिवर्तन के चलते दो पीढिय़ों में हमेशा विरोधाभास रहता है, किंतु ऐसा विरोधाभास जो आपको आपके मार्ग से विचलित करने लगे और पीड़ा का कारण बने तो ऐसा गुरु ग्रह के कारण होता है. इससे मुक्ति के लिए भगवान श्रीविष्णुदेव की आराधना करें. जिन्हें अपने पति से परेशानी है, वे भी भगवान श्रीविष्णुदेव की पूजा-अर्चना करें.

* सहयोगियों/कार्यकर्ताओं से परेशानी- यदि सहयोगियों और कर्मचारियों से परेशानी है तो अकारक शनिदेव के कारण संभव है. इस स्थिति में महावीर हनुमान की उपासना श्रेष्ठ है.

* पुत्र से परेशानी- केतु ग्रह के नकारात्मक प्रभाव के कारण पुत्र से कष्ट संभव है. ऐसी स्थिति में राहत के लिए श्रीगणेश की आराधना उत्तम है. 

* बहन/बेटी से परेशानी- बहन-बेटियों की पारिवारिक स्थितियां या गतिविधियों से यदि कष्ट हो तो बुध ग्रह इसका कारण है. अत: देवी पूज-उपासना करके स्थिति को सुधारा जा सकता है. 

* भाई/रक्त संबंधियों से परेशानी- मंगल ग्रह की प्रतिकूलता भाई और रक्त संबंधियों से कष्ट का कारण बनती है. ऐसी स्थिति में श्रीगणेश, श्रीराम और महावीर हनुमान की आराधना से स्थिति को अनुकूल किया जा सकता है.

* दुष्ट प्रकृति के व्यक्तियों से परेशानी- यदि आपको ऐसा महसूस हो रहा है कि आपको अज्ञात शत्रुओं से भय है या आपके आसपास कुछ दुष्ट प्रकृति के व्यक्ति आपके विरूद्ध कार्य कर रहे हैं तो यह राहु के नकारात्मक प्रभाव के कारण संभव है, देवी सरस्वती की उपासना करें.

- आज का राशिफल -

निम्न राशि के लिए उत्तम चन्द्रबलम 10:21 तक:

वृषभ, मिथुन, कन्या,
तुला, मकर, मीन

*सिंह राशि में जन्में लोगो के लिए अष्टम चन्द्र

उसके पश्चात -

निम्न राशि के लिए उत्तम चन्द्रबलम अगले दिन सूर्योदय तक:

मेष, मिथुन, कर्क,
तुला, वृश्चिक, कुम्भ

*कन्या राशि में जन्में लोगो के लिए अष्टम चन्द्र  

* यहां राशिफल चन्द्र के गोचर पर आधारित है, व्यक्तिगत जन्म के ग्रह और अन्य ग्रहों के गोचर के कारण शुभाशुभ परिणामों में कमी-वृद्धि संभव है, इसलिए अच्छे समय का सद्उपयोग करें और खराब समय में सतर्क रहें. 

सोमवार का चौघडिय़ा -

दिन का चौघडिय़ा       रात्रि का चौघडिय़ा

पहला- अमृत             पहला- चर

दूसरा- काल              दूसरा- रोग

तीसरा- शुभ             तीसरा- काल

चौथा- रोग               चौथा- लाभ

पांचवां- उद्वेग           पांचवां- उद्वेग

छठा- चर                छठा- शुभ

सातवां- लाभ            सातवां- अमृत

आठवां- अमृत            आठवां- चर

* चौघडिय़ा का उपयोग कोई नया कार्य शुरू करने के लिए शुभ समय देखने के लिए किया जाता है. 

* दिन का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* रात का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* अमृत, शुभ, लाभ और चर, इन चार चौघडिय़ाओं को अच्छा माना जाता है और शेष तीन चौघडिय़ाओं- रोग, काल और उद्वेग, को उपयुक्त नहीं माना जाता है.

* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, स्थानीय पंरपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं.

* अपने ज्ञान के प्रदर्शन एवं दूसरे के ज्ञान की परीक्षा में समय व्यर्थ गंवाएं क्योंकि ज्ञान अनंत है और जीवन का अंत है!   

पंचांग

सोमवार, 14 अक्टूबर 2019

शक सम्वत1941 विकारी

विक्रम सम्वत 2076

काली सम्वत 5121

दिन काल 11:32:10

मास कार्तिक

तिथि प्रतिपदा - 28:23:23 तक

नक्षत्र रेवती - 10:20:33 तक

करण बालव - 15:34:00 तक, कौलव - 28:23:23 तक

पक्ष कृष्ण

योग हर्शण - 28:56:58 तक

सूर्योदय 06:20:59

सूर्यास्त 17:53:10

चन्द्र राशि मीन - 10:20:33 तक

चन्द्रोदय 18:27:59

चन्द्रास्त 06:29:00

ऋतु शरद

दिशा शूल: पूर्व में

राहु काल वास: उत्तर-पश्चिम में

नक्षत्र शूल: कोई नहीं

चन्द्र वास: उत्तर में 10:21 तक, पूर्व में 10:21 से

आज का दिन : ज्योतिष की नज़र में


जानिए कैसा रहेगा आपका भविष्य


खबर : चर्चा में


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