नई दिल्ली. कांग्रेस सांसद शशि थरूर अक्सर मोदी सरकार पर निशाना साधते रहते हैं. निशाना साधने के क्रम में वो इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल करते हैं कि आपको शब्दकोष खोलना पड़ जाए. लिंचिंग के संबंध में करीब 50 लोगों ने पीएम नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखी थी. अब इस मुद्दे पर उन्होंने भी चिट्ठी लिखी है. बता दें कि विजयदशमी के मौके पर नागपुर में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि देश में अजीब सा ट्रेंड बन चुका है कि हर एक घटना को लिंचिंग से जोड़कर देखा जा रहा है.

शशि थरूर अपने खत में लिखते हैं कि पीएम मोदी को उन लोगों की बातों को भी सुनने की जरूरत है जो सरकारी नीतियों से इत्तेफाक नहीं रखते हैं. सार्वजनिक जीवन में सरकार की नीतियों का विरोध करने का हक हर किसी को है. इसका अर्थ ये नहीं है कि असहमति के आवाजों को दबा दिया जाए. हाल ही में बिहार के मुजफ्फरपुर में फिल्म जगत से जुड़े 49 प्रतिष्ठित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी जिन्होंने मॉब लिंचिग का जिक्र करते हुए जुलाई के महीने में चिट्ठी लिखी थी. 

अनुच्छेद 19(1) का जिक्र करते हुए शशि थरूर लिखते हैं कि हर किसी को बोलने का अधिकार है और सरकार को उस स्वतंत्रता का सम्मान करना चाहिए. देश के सभी लोग पीएम मोदी से अपेक्षा करते हैं कि उनकी सरकार बोलने की आजादी का सम्मान करेगी. उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में जो लोग सरकार के खिलाफ बात करते हैं उन्हें देशद्रोही मान लिया जाता है. लेकिन ऐसा होने से लोकतंत्र मजबूत नहीं हो सकता है. लोकतंत्र में हर किसी को अपनी बात रखने का अधिकार है और उन्हें लगता है कि एजेंसियों और सरकारों को उसका सम्मान करना चाहिए. 

आज का दिन : ज्योतिष की नज़र में


जानिए कैसा रहेगा आपका भविष्य


खबर : चर्चा में


************************************************************************************




Disclaimer : इस न्यूज़ पोर्टल को बेहतर बनाने में सहायता करें और किसी खबर या अंश मे कोई गलती हो या सूचना / तथ्य में कोई कमी हो अथवा कोई कॉपीराइट आपत्ति हो तो वह info@palpalindia.com पर सूचित करें। साथ ही साथ पूरी जानकारी तथ्य के साथ दें। जिससे आलेख को सही किया जा सके या हटाया जा सके ।