कई बार वैज्ञानिकों को खोजबीन के दौरान कुछ ऐसा हाथ लगता है, जो उन्हें ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया को हैरान कर देता है. भूमध्य सागर में भी वैज्ञानिकों को कुछ ऐसा ही मिला है. उन्होंने यहां एक छिपे हुए महाद्वीप की खोज की है, जिसका नाम ग्रेटर एड्रिया है. इस दौरान वैज्ञानिकों ने यह भी साफ किया है कि यह अटलांटिस का खोया हुआ शहर नहीं है. 

पिछले महीने गोंडवाना रिसर्च जर्नल में छपी एक रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है कि ग्रीनलैंड के आकार का यह महाद्वीप (ग्रेटर एड्रिया) करीब 14 करोड़ साल पहले उत्तरी अफ्रीका से अलग होकर भूमध्य सागर में डूब गया था. 

उट्रेक्त विश्वविद्यालय में वैश्विक टेक्टोनिक्स और पैलियोजियोग्राफी के प्रोफेसर डेव वान हिंसबर्गेन ने बताया कि बड़ी संख्या में पर्यटक ग्रेटर एड्रिया के खोए हुए महाद्वीप पर हर साल छुट्टियां मनाने आते हैं, लेकिन उन्हें इस बात का पता ही नहीं है. 

प्रोफेसर डेव ने बताया कि जांच के दौरान यह पाया गया कि ग्रेटर एड्रिया की अधिकांश पर्वत शृंखलाएं एकल महाद्वीप से उत्पन्न हुई थीं और ये पर्वत शृंखलाएं 20 करोड़ साल पहले उत्तरी अफ्रीका से अलग हुई थीं. इस महाद्वीप पर एकमात्र बचा हुआ भाग एक पट्टी है, जो इटली के ट्यूरिन शहर से होते हुए एड्रियाटिक सागर तक जाती है. 

वैज्ञानिकों के मुताबिक, ग्रेटर एड्रिया का अधिकांश भाग पानी के अंदर था, जो छिछले समुद्रों, प्रवाल भित्तियों और तलछटों से ढंका हुआ था. इन तलछटों की चट्टानें बनीं और धीरे-धीरे ये चट्टानें पर्वत शृंखलाओं में बदल गईं. इनसे ही आल्प्स, एपिनेन्स, बाल्कन्स, ग्रीस और तुर्की के पर्वतों का निर्माण हुआ. इस खोए हुए महाद्वीप के अवशेषों को तुर्की में टौरस के पर्वतों में देखा जा सकता है. 

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