* प्रदीप लक्ष्मीनारायण द्विवेदी (9772354346)  

जीवन का हर कर्म जय-विजय के उद्देश्य से किया जाता है और जय-विजय ही कर्म की कामयाबी की घोषणा करती है... भगवान श्रीराम ने युद्ध से पूर्व देवी अपराजिता पूजन किया था और इसीलिए दशहरे के अवसर पर देवी अपराजिता की पूजा-अर्चना की जाती है!

देवी दुर्गा स्वरूपा देवी अपराजिता का पूजन आदिकाल से होता रहा है क्योंकि देवी अपराजिता युद्ध के दौरान ऊर्जा और शक्ति प्रदान करती हैं जिसके नतीजे में किसी भी संघर्ष में सफलता प्राप्त होती है!

विजय दशमी के दिन शुभ मुहूर्त में देवी अपराजिता की श्रद्धा से पूजा करें तथा कार्यसिद्धि, मतलब... जय-विजय के लिए प्रार्थना करें!

किसी महत्वपूर्ण यात्रा पर जाते समय भी देवी अपराजिता की पूजा-प्रार्थना, यात्रा के विघ्र समाप्त करती है. वैसे तो दुर्गा स्वरूपा देवी अपराजिता की पूजा के अनेक मंत्र, स्त्रोत आदि हैं किन्तु पूजा में भाषा से ज्यादा भाव महत्वपूर्ण होते हैं इसलिए यदि किसी स्त्रोत से पूजा नहीं कर पाएं तो अपनी भावभाषा में देवी अपराजिता की पूजा प्रार्थना करें... त्रिपुरा स्वरूपे देवी अपराजितायै नम:!

आज का राशिफल -

निम्न राशि के लिए उत्तम चन्द्रबलम अगले दिन सूर्योदय तक:

मेष, कर्क, सिंह,
वृश्चिक, मकर, मीन

*मिथुन राशि में जन्में लोगो के लिए अष्टम चन्द्र  

* यहां राशिफल चन्द्र के गोचर पर आधारित है, व्यक्तिगत जन्म के ग्रह और अन्य ग्रहों के गोचर के कारण शुभाशुभ परिणामों में कमी-वृद्धि संभव है, इसलिए अच्छे समय का सद्उपयोग करें और खराब समय में सतर्क रहें.

- मंगलवार का चौघडिय़ा -

दिन का चौघडिय़ा        रात्रि का चौघडिय़ा

पहला- रोग               पहला- काल

दूसरा- उद्वेग             दूसरा- लाभ

तीसरा- चर              तीसरा- उद्वेग

चौथा- लाभ               चौथा- शुभ

पांचवां- अमृत            पांचवां- अमृत

छठा- काल               छठा- चर

सातवां- शुभ             सातवां- रोग

आठवां- रोग            आठवां- काल

* चौघडिय़ा का उपयोग कोई नया कार्य शुरू करने के लिए शुभ समय देखने के लिए किया जाता है.

* दिन का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* रात का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* अमृत, शुभ, लाभ और चर, इन चार चौघडिय़ाओं को अच्छा माना जाता है और शेष तीन चौघडिय़ाओं- रोग, काल और उद्वेग, को उपयुक्त नहीं माना जाता है.

* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, स्थानीय पंरपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं.

* अपने ज्ञान के प्रदर्शन एवं दूसरे के ज्ञान की परीक्षा में समय व्यर्थ गंवाएं क्योंकि ज्ञान अनंत है और जीवन का अंत है

पंचांग

मंगलवार, 8 अक्टूबर 2019

विजयदशमी

दुर्गा विसर्जन

मैसूर दसरा

विद्यारम्भम् का दिन

मध्वाचार्य जयन्ती

शक सम्वत 1941 विकारी

विक्रम सम्वत 2076

काली सम्वत 5121

दिन काल11:42:09

मास आश्विन

तिथि दशमी - 14:52:03 तक

नक्षत्र श्रवण - 20:12:05 तक

करण गर - 14:52:03 तक, वणिज - 28:04:56 तक

पक्ष शुक्ल

योग धृति - 24:43:27 तक

सूर्योदय 06:17:33

सूर्यास्त 17:59:43

चन्द्र राशि मकर

चन्द्रोदय 15:11:00

चन्द्रास्त 26:07:00

ऋतु शरद

दिशा शूल: उत्तर में

राहु काल वास: पश्चिम में

नक्षत्र शूल: कोई नहीं

चन्द्र वास: दक्षिण में

* जय-विजय और कार्यसिद्धि के लिए आठों दिशाओं के स्वामी अष्टविनायक श्रीगणेश और देवी त्रिपुरा की पूजा-प्रार्थना के लिए हार्दिक गणेश गरबा...

आज का दिन : ज्योतिष की नज़र में


जानिए कैसा रहेगा आपका भविष्य


खबर : चर्चा में


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