-प्रदीप लक्ष्मीनारायण द्विवेदी (9772354346)

* नवरात्रि के दौरान कन्या पूजन का विशेष महत्व है.

* कई श्रद्धालु पहले ही दिन से प्रतिदिन कन्या पूजन करते हैं तो ज्यादातर सप्तमी तिथि से दुर्गाष्टमी और नवमी के दिन तक कन्या पूजा करते हैं.

* इन कन्याओं को नौ देवी का स्वरूप मानकर इनका स्वागत किया जाता है, पूजा की जाती है और भोजन कराया जाता है जिससे देवी दुर्गा प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों को सुख, समृद्धि और सफलता का वरदान प्रदान करती हैं.

* कन्या पूजन अपनी श्रद्धा और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार करें, मन से की गई पूजा देवी सहर्ष स्वीकार करती है.

* इन कन्याओं को स्वच्छ जगह बिठाकर सभी के पैरों को अपने हाथों से धोना चाहिए और पैर छूकर शुभाशीष लेना चाहिए.

* इसके बाद उनके माथे पर तिलक लगाना चाहिए.

* देवी दुर्गा का ध्यान करके इन्हें देवी स्वरूप मानकर ससम्मान भोजन कराना चाहिए.

* भोजन के बाद कन्याओं को यथाशक्ति दक्षिणा, उपहार आदि प्रदान करके उनके पैर छूकर शुभाशीष लेना चाहिए.

* कन्या पूजन में कन्याओं की आयु दो वर्ष से ऊपर तथा दस वर्ष तक होनी चाहिए.

* कन्याओं की संख्या कम-से-कम 9 तो होनी ही चाहिए और एक बालक भी होना चाहिए, जिसे हनुमान स्वरूप माना जाता है.

* यदि 9 से ज्यादा कन्याएं है तो भी अच्छा है.

* दो वर्ष की कन्या के पूजन से दुख-दरिद्रता दूर होती है.

* तीन वर्ष की कन्या पूजन से धन-धान्य की वृद्धि होती है.

* चार वर्ष की कन्या की पूजा से परिवार का कल्याण होता है.

* पांच वर्ष की कन्या को पूजने से व्यक्ति रोगमुक्त हो जाता है.

* छह वर्ष की कन्या की पूजा से जय-विजय और राजयोग प्राप्त होता है.

* सात वर्ष की कन्या का पूजन करने से ऐश्वर्य प्राप्त होता है.

* आठ वर्ष की कन्या का पूजन करने से विवाद में विजय प्राप्त होती है.

* नौ वर्ष की कन्या का पूजन करने से शत्रु-नाश होता है, तो असंभव कार्य संभव होते हैं.

* दस वर्ष की कन्या-पूजा तमाम मनोकामनाएं पूरी करती है.

* देवी का नौवां स्वरूप है- सिद्धिदात्री, नवमी तिथि पर इनकी पूजा-अर्चना की जाती है, सिद्धिदात्री स्वरूप की पूजा-अर्चना करें, सिद्धि मिलेगी, पराक्रम बढ़ेगा!

- आज का राशिफल -

निम्न राशि के लिए उत्तम चन्द्रबलम अगले दिन सूर्योदय तक:

मेष, कर्क, सिंह,
वृश्चिक, मकर, मीन

*मिथुन राशि में जन्में लोगो के लिए अष्टम चन्द्र

* यहां राशिफल चन्द्र के गोचर पर आधारित है, व्यक्तिगत जन्म के ग्रह और अन्य ग्रहों के गोचर के कारण शुभाशुभ परिणामों में कमी-वृद्धि संभव है, इसलिए अच्छे समय का सद्उपयोग करें और खराब समय में सतर्क रहें.

- सोमवार का चौघडिय़ा -

दिन का चौघडिय़ा     रात्रि का चौघडिय़ा

पहला- अमृत           पहला- चर

दूसरा- काल            दूसरा- रोग

तीसरा- शुभ           तीसरा- काल

चौथा- रोग            चौथा- लाभ

पांचवां- उद्वेग        पांचवां- उद्वेग

छठा- चर             छठा- शुभ

सातवां- लाभ         सातवां- अमृत

आठवां- अमृत         आठवां- चर

* चौघडिय़ा का उपयोग कोई नया कार्य शुरू करने के लिए शुभ समय देखने के लिए किया जाता है.

* दिन का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* रात का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* अमृत, शुभ, लाभ और चर, इन चार चौघडिय़ाओं को अच्छा माना जाता है और शेष तीन चौघडिय़ाओं- रोग, काल और उद्वेग, को उपयुक्त नहीं माना जाता है.

* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, स्थानीय पंरपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं.

* अपने ज्ञान के प्रदर्शन एवं दूसरे के ज्ञान की परीक्षा में समय व्यर्थ गंवाएं क्योंकि ज्ञान अनंत है और जीवन का अंत है!

पंचांग

सोमवार, 7 अक्टूबर 2019

आयुध पूजा

दक्षिण सरस्वती पूजा

बंगाल महा नवमी

बुद्ध जयन्ती

शक सम्वत 1941 विकारी

विक्रम सम्वत 2076

काली सम्वत 5121

दिन काल 11:43:51

मास अमांत आश्विन

मास पूर्णिमांत आश्विन

तिथि नवमी - 12:40:09 तक

नक्षत्र उत्तराषाढ़ा - 17:25:33 तक

करण कौलव - 12:40:09 तक, तैतिल - 25:43:17 तक

पक्ष शुक्ल

योग सुकर्मा - 23:56:15 तक

सूर्योदय 06:16:59

सूर्यास्त 18:00:51

चन्द्र राशि मकर

चन्द्रोदय 14:28:59

चन्द्रास्त 25:12:59

ऋतु शरद

दिशा शूल: पूर्व में

राहु काल वास: उत्तर-पश्चिम में

नक्षत्र शूल: कोई नहीं

चन्द्र वास: दक्षिण में

आज का दिन : ज्योतिष की नज़र में


जानिए कैसा रहेगा आपका भविष्य


खबर : चर्चा में


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