* देवी दुर्गा का आठवां स्वरूप महागौरी है.

* नवरात्रि के आठवें दिन देवी महागौरी की पूजा-अर्चना की जाती है. * यह भोलेनाथ की अर्धांगिनी हंै जिन्होंने कठोर तपस्या के बाद शिवजी को अपने पति के रुप में प्राप्त किया था.

* देवी महागौरी की चार भुजाएं है जिनमें से उनके दो हाथों में डमरु और त्रिशुल हंै और शेष दो हाथ- अभय और वर मुद्रा में है.

* देवी महागौरी की पूजा-अर्चना से राहु ग्रह की अनुकुलता प्राप्त होती है.

* जिन श्रद्धालुओं की राहु की दशा-अन्तरदशा चल रही हो उन्हें देवी महागौरी की पूजा-अर्चना करनी चाहिए.

* जिनका पढ़ाई में मन नहीं लगता हो उन्हें भी देवी महागौरी की उपासना करनी चाहिए.

* संतान के गौरवर्ण, रूप-सौन्दर्य-वैभव प्राप्ति के लिए श्रद्धालुओं को देवी महागौरी की आराधना करनी चाहिए.

* जिन श्रद्धालुओं को रहस्यमय एवं अज्ञात शत्रुओं से भय हो उन्हें देवी महागौरी की रक्षार्थ आराधना करनी चाहिए.

* देवी की इस मंत्र से पूजा-अर्चना करें... ओम देवी महागौर्यै नम:॥

- आज का राशिफल -

 निम्न राशि के लिए उत्तम चन्द्रबलम 21:37 तक:

मिथुन, कर्क, तुला,

धनु, कुम्भ, मीन

*वृषभ राशि में जन्में लोगो के लिए अष्टम चन्द्र

उसके पश्चात -

निम्न राशि के लिए उत्तम चन्द्रबलम अगले दिन सूर्योदय तक:

मेष, कर्क, सिंह,
वृश्चिक, मकर, मीन

*मिथुन राशि में जन्में लोगो के लिए अष्टम चन्द्र  

* यहां राशिफल चन्द्र के गोचर पर आधारित है, व्यक्तिगत जन्म के ग्रह और अन्य ग्रहों के गोचर के कारण शुभाशुभ परिणामों में कमी-वृद्धि संभव है, इसलिए अच्छे समय का सद्उपयोग करें और खराब समय में सतर्क रहें.

रविवार का चौघडिय़ा -

दिन का चौघडिय़ा         रात्रि का चौघडिय़ा

पहला- उद्वेग               पहला- शुभ

दूसरा- चर                 दूसरा- अमृत

तीसरा- लाभ                तीसरा- चर

चौथा- अमृत                चौथा- रोग

पांचवां- काल               पांचवां- काल

छठा- शुभ                 छठा- लाभ

सातवां- रोग               सातवां- उद्वेग

आठवां- उद्वेग             आठवां- शुभ

* चौघडिय़ा का उपयोग कोई नया कार्य शुरू करने के लिए शुभ समय देखने के लिए किया जाता है. 

* दिन का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* रात का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* अमृत, शुभ, लाभ और चर, इन चार चौघडिय़ाओं को अच्छा माना जाता है और शेष तीन चौघडिय़ाओं- रोग, काल और उद्वेग, को उपयुक्त नहीं माना जाता है.

* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, स्थानीय पंरपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं.

* अपने ज्ञान के प्रदर्शन एवं दूसरे के ज्ञान की परीक्षा में समय व्यर्थ गंवाएं क्योंकि ज्ञान अनंत है और जीवन का अंत है

पंचांग

रविवार, 6 अक्टूबर 2019

दुर्गा अष्टमी

सन्धि पूजा

शक सम्वत 1941 विकारी

विक्रम सम्वत 2076

काली सम्वत 5121

दिन काल 11:45:32

मास आश्विन

तिथि अष्टमी - 10:56:51 तक

नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा - 15:04:10 तक

करण बव - 10:56:51 तक, बालव - 23:44:11 तक

पक्ष शुक्ल

योग अतिगंड - 23:26:31 तक

सूर्योदय 06:16:27

सूर्यास्त 18:01:59

चन्द्र राशि धनु - 21:36:31 तक

चन्द्रोदय 13:41:59

चन्द्रास्त 24:18:59

ऋतु शरद

दिशा शूल: पश्चिम में

राहु काल वास: उत्तर में

नक्षत्र शूल: कोई नहीं

चन्द्र वास: पूर्व में 21:37 तक,दक्षिण में 21:37 से

आज का दिन : ज्योतिष की नज़र में


जानिए कैसा रहेगा आपका भविष्य


खबर : चर्चा में


************************************************************************************




Disclaimer : इस न्यूज़ पोर्टल को बेहतर बनाने में सहायता करें और किसी खबर या अंश मे कोई गलती हो या सूचना / तथ्य में कोई कमी हो अथवा कोई कॉपीराइट आपत्ति हो तो वह info@palpalindia.com पर सूचित करें। साथ ही साथ पूरी जानकारी तथ्य के साथ दें। जिससे आलेख को सही किया जा सके या हटाया जा सके ।