कोलकाता. सरकार की 4जी स्पेक्ट्रम की नीलामी मुकेश अंबानी की रिलायंस जियो इन्फोकॉम के लिए भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया से भी ज्यादा अहम है. विश्लेषकों के मुताबिक रिलायंस कॉम्युनिकेशंस की 800 मेगाहर्ट्ज बैंड वाली ज्यादातर 4G एयरवेव जुलाई-अगस्त 2021 तक 18 सर्किल में एक्सपायर हो जाएंगी. कंपनी इनका इस्तेमाल एक शेयरिंग समझौते के तहत कर रही है.

भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया के भी आठ सर्किल में एयरवेव्स लाइसेंस खत्म होने वाले हैं. हालांकि, ऐसे ज्यादातर स्पेक्ट्रम सस्ते 1800 मेगाहर्ट्ज बैंड में हैं. जियो की आज वही हालत है, जो भारती एयरटेल, वोडाफोन इंडिया और आइडिया सेलुलर (तब दोनों कंपनियों का मर्जर नहीं हुआ था) की फरवरी 2014 और मार्च 2015 की नीलामियों के दौरान थी. उस समय तीनों कंपनियों को एक्सपायर होने वालीं 900 मेगाहर्ट्ज बैंड एयरवेव्स को फिर से खरीदने के लिए ऊंची बोली लगानी पड़ी थी. इसी वजह से बाद में भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया पर भारी कर्ज हो गया. दोनों कंपनियां आज तक उससे जूझ रही हैं.

SBI कैप सिक्योरिटीज के रिसर्च को-हेड राजीव शर्मा ने बताया, 'आरकॉम के 800 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम ने देश में जियो की 4G सेवाओं के विस्तार में बड़ी भूमिका निभाई है.' उन्होंने बताया कि नीलामी जल्द होने से जियो को बिजनस में बने रहने और देशभर में 4G कवरेज की क्वॉलिटी बरकरार रखने में मदद मिलेगी. जियो शेयरिंग पैक्ट के तहत दिवालिया टेलिकॉम कंपनी आरकॉम की 800 मेगाहर्ट्ज एयरवेव्स का इस्तेमाल कर रही है.

कंपनी 21 सर्किल के जरिए देशभर में 4G की सुविधा देती है. सूत्र ने ईटी को बताया कि इनमें से 17 में एयरवेव के इस्तेमाल की अवधि जुलाई 2021 और एक की अगस्त 2021 में खत्म होने वाली है. कुल 18 सर्किल में 800 मेगाहर्ट्ज बैंड में लगभग 49 यूनिट्स एक्सपायर हो जाएंगी. रेग्युलेटर के प्रस्ताव के मुताबिक, अगली नीलामी में इस सेगमेंट में 59 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम ऑफर किए जाएंगे. विश्लेषकों ने बताया कि जियो के पास सभी 22 सर्किल में 1800 मेगाहर्ट्ज और 2300 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम हैं. हालांकि, 4जी के लिए 800 मेगाहर्ट्ज बैंड सबसे अच्छा है. जियो के करीबी सूत्र ने बताया, 'कंपनी स्पेक्ट्रम नीलामी जल्द शुरू करने के पक्ष में है. इससे 4जी की बढ़ती मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी.'

एनालिसिस मेसन में पार्टनर रोहन धमीजा ने बताया कि 2014 और 2015 में टेलिकॉम कंपनियों की माली हालत अच्छी होने के कारण उनके बीच स्पेक्ट्रम के लिए मुकाबला कड़ा था. इसलिए तब वोडाफोन आइडिया और एयरटेल ने ऊंची बोली लगाई थी. अब हालात अलग हैं. उन्होंने बताया, 'वोडाफोन आइडिया और एयरटेल की वित्तीय हालत बिगड़ने से उनके लिए जियो से कम गीगाहर्ट्ज वाले स्पेक्ट्रम की नीलामी में भिड़ना मुश्किल होगा.' उन्हें सितंबर-अक्टूबर 2021 में एक्सपायर हो रहे खुद के 1800 मेगाहर्ट्ज वाले स्पेक्ट्रम को वापस खरीदने के लिए भी पैसे की जरूरत होगी.

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