पेरिस. कश्मीर को लेकर दुष्प्रचार में जुटे पाकिस्तान की एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फजीहत हुई है. पाकिस्तान ने अपने अवैध कब्जे वाले कश्मीर  के कथित राष्ट्रपति मसूद खान की फ्रांसीसी संसद में बैठक कराने की हर मुमकिन कोशिश की लेकिन भारत ने अपने कूटनीतिक प्रयासों से इस्लामाबाद ने नापाक इरादों पर पानी फेर दिया. इससे पाकिस्‍तान को एक बार फिर कश्‍मीर  और भारत के खिलाफ अपने प्रोपेगेंडा फैलाने पर हार का मुंह देखना पड़ा है.

दरअसल, फ्रांस की राजधानी  पेरिस  स्थित पाकिस्तानी दूतावास फ्रांस की संसद नेशनल असेंबली में पीओके के राष्ट्रपति मसूद खान का कार्यक्रम कराना चाहता था. मसूद खान को नेशनल असेंबली में एक कार्यक्रम के लिए चीफ गेस्ट के तौर पर उन्‍हें न्योता दिया गया था, लेकिन भारत ने पाकिस्तान की कोशिश को नाकाम करने के लिए हर कूटनीतिक प्रयास शुरू कर दिए.  

भारत इस कार्यक्रम का शुरू से विरोध कर रहा था. भारतीय दूतावास ने फ्रांसीसी विदेश मंत्रालय को डेमार्श जारी कह दो टूक कहा कि इस तरह का न्योता भारत की संप्रभुता का उल्लंघन होगा. पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाला कश्मीर  समेत पूरा जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है. भारतीय दूतावास के साथ-साथ भारतीय समुदाय ने भी सक्रियता दिखाई.

भारतीय समुदाय ने नेशनल असेंबली के स्पीकर और तमाम सांसदों को भी खत लिखा. भारत के विरोध के बाद पाकिस्तान को मुंह की खानी पड़ी.  मसूद खान को नेशनल असेंबली के कार्यक्रम में शामिल होने की इजाजत नहीं दी गई. उनकी जगह पाकिस्तानी राजनयिक मोइन-उल-हक ने कार्यक्रम में पहुंचे.  कार्यक्रम पूरी तरह फ्लॉप रहा और स्थानीय हस्तियां इसमें शामिल नहीं हुईं.

कार्यक्रम में शामिल होने वालों में ज्यादातर पाकिस्तानी दूतावास के कर्मचारी ही थे. इस पूरी घटनाक्रम पर नजर रख रहे लोगों के मुताबिक फ्रांस के सांसदों के नहीं पहुंचने की आशंका के चलते पाकिस्तानी राजदूत को मसूद खान के सम्मान में आयोजित डिनर को भी रद्द करना पड़ गया.

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