* देवी दुर्गा के नौ रूप हैं, जिनकी नवरात्रि में आराधना की जाती है.

* देवी दुर्गा का तीसरा स्वरूप चंद्रघंटा है.

* देवी के माथे पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र होने के कारण इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है.

* देवी चंद्रघंटा के दस हाथ हैं जिनमें इन्होंने शंख, कमल, धनुष-बाण, तलवार, कमंडल, त्रिशूल, गदा आदि शस्त्र धारण कर रखे हैं. 

* सिंह पर सवार देवी चंद्रघंटा का युद्ध के लिए सुसज्जित स्वरूप है.  

* देवी चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना से शुक्र ग्रह की अनुकुलता प्राप्त होती है इसलिए वृष-तुला राशिवालों को देवी की आराधना से संपूर्ण सुख की प्राप्ति होती है.

* जिन श्रद्धालुओं की शुक्र की दशा-अन्तरदशा चल रही हो उन्हें भी देवी चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना करनी चाहिए. 

* भौतिक सुख- वाहन, मकान आदि की कामना रखनेवाले श्रद्धालुओं को देवी चंद्रघंटा की आराधना करनी चाहिए.

* जिन श्रद्धालुओं के पत्नी से मतभेद हों वे संकल्प लेकर देवी चंद्रघंटा की आराधना करें, विवाद से राहत मिलेगी.

* जिन श्रद्धालुओं को उपरी बाधा की परेशानी हो उन्हें देवी चंद्रघंटा की आराधना करनी चाहिए, राहत मिलेगी.

* देवी चंद्रघंटा की इस मंत्र से पूजा-अर्चना करें... देवी चन्द्रघण्टायै नम:॥

आज का राशिफल -

निम्न राशि के लिए उत्तम चन्द्रबलम अगले दिन सूर्योदय तक:

मेष, वृषभ, सिंह,
तुला, धनु, मकर

*मीन राशि में जन्में लोगो के लिए अष्टम चन्द्र  

* यहां राशिफल चन्द्र के गोचर पर आधारित है, व्यक्तिगत जन्म के ग्रह और अन्य ग्रहों के गोचर के कारण शुभाशुभ परिणामों में कमी-वृद्धि संभव है, इसलिए अच्छे समय का सद्उपयोग करें और खराब समय में सतर्क रहें.

मंगलवार का चौघडिय़ा -

दिन का चौघडिय़ा        रात्रि का चौघडिय़ा

पहला- रोग               पहला- काल

दूसरा- उद्वेग             दूसरा- लाभ

तीसरा- चर              तीसरा- उद्वेग

चौथा- लाभ               चौथा- शुभ

पांचवां- अमृत             पांचवां- अमृत

छठा- काल                छठा- चर

सातवां- शुभ              सातवां- रोग

आठवां- रोग              आठवां- काल

* चौघडिय़ा का उपयोग कोई नया कार्य शुरू करने के लिए शुभ समय देखने के लिए किया जाता है.

* दिन का चौघडिय़ाअपने शहर में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* रात का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* अमृत, शुभ, लाभ और चर, इन चार चौघडिय़ाओं को अच्छा माना जाता है और शेष तीन चौघडिय़ाओं- रोग, काल और उद्वेग, को उपयुक्त नहीं माना जाता है.

* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, स्थानीय पंरपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं.

* अपने ज्ञान के प्रदर्शन एवं दूसरे के ज्ञान की परीक्षा में समय व्यर्थ गंवाएं क्योंकि ज्ञान अनंत है और जीवन का अंत है

पंचांग

मंगलवार, 1 अक्टूबर  2019

शक सम्वत 1941 विकारी

विक्रम सम्वत 2076

काली सम्वत 5121

दिन काल 11:53:59

मास आश्विन

तिथि तृतीया - 13:56:58 तक

नक्षत्र स्वाति - 14:21:12 तक

करणगर - 13:56:58 तक, वणिज - 24:43:54 तक

पक्ष शुक्ल

योग वैधृति - 08:30:05 तक, विश्कुम्भ - 29:22:40 तक

सूर्योदय 06:13:47

सूर्यास्त 18:07:46

चन्द्र राशि तुला

चन्द्रोदय 08:45:00

चन्द्रास्त 20:15:59

ऋतु शरद

दिशा शूल: उत्तर में

राहु काल वास: पश्चिम में

नक्षत्र शूल: कोई नहीं

चन्द्र वास: पश्चिम में

आज का दिन : ज्योतिष की नज़र में


जानिए कैसा रहेगा आपका भविष्य


खबर : चर्चा में


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