* देवी दुर्गा के नौ रूप हैं, जिनकी नवरात्रि में आराधना की जाती है.

* द्वितीय स्वरूप- देवी ब्रह्मचारिणी हैं, जिनकी नवरात्रि की द्वितीया तिथि पर पूजा-अर्चना की जाती है.  

* देवी ब्रह्मचारिणी ने शिवजी के लिए केवल फल-फूल-पत्ते खाकर घोर तपस्या की थी इसलिए जो श्रद्धालु तपस्या में मनोबल बनाए रखना चाहते हैं वे देवी ब्रह्मचारिणी की आराधना करें.

* देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना से मंगल ग्रह की अनुकुलता प्राप्त होती है इसलिए मेष-वृश्चिक राशिवालों को देवी की आराधना से संपूर्ण सुख की प्राप्ति होती है.

* भूमि प्राप्ति, ऋणमुक्ति, रक्तरोगमुक्ति और पदोन्नति के लिए देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना करें.

* जिन श्रद्धालुओं के रक्त संबंधियों से मतभेद हों वे संकल्प लेकर देवी ब्रह्मचारिणी की आराधना करें, विवाद से राहत मिलेगी.

* देवी ब्रह्मचारिणी के दाहिने हाथ में जप की माला एवं बाएं हाथ में कमण्डल रहता है.

* इस अवसर पर ऐसी कन्याओं का पूजन किया जाता है जिनकी सगाई हो गई है लेकिन शुभ-विवाह नहीं हुआ है. 

* देवी की इस मंत्र से पूजा-अर्चना करें... देवी ब्रह्मचारिण्यै नम:॥

- आज का राशिफल -

निम्न राशि के लिए उत्तम चन्द्रबलम अगले दिन सूर्योदय तक:

मेष, वृषभ, सिंह,
तुला, धनु, मकर

*मीन राशि में जन्में लोगो के लिए अष्टम चन्द्र  

* यहां राशिफल चन्द्र के गोचर पर आधारित है, व्यक्तिगत जन्म के ग्रह और अन्य ग्रहों के गोचर के कारण शुभाशुभ परिणामों में कमी-वृद्धि संभव है, इसलिए अच्छे समय का सद्उपयोग करें और खराब समय में सतर्क रहें. 

सोमवार का चौघडिय़ा -

दिन का चौघडिय़ा      रात्रि का चौघडिय़ा

पहला- अमृत            पहला- चर

दूसरा- काल             दूसरा- रोग

तीसरा- शुभ            तीसरा- काल

चौथा- रोग              चौथा- लाभ

पांचवां- उद्वेग          पांचवां- उद्वेग

छठा- चर                छठा- शुभ

सातवां- लाभ            सातवां- अमृत

आठवां- अमृत           आठवां- चर

* चौघडिय़ा का उपयोग कोई नया कार्य शुरू करने के लिए शुभ समय देखने के लिए किया जाता है. 

* दिन का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* रात का चौघडिय़ाअपने शहर में सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* अमृत, शुभ, लाभ और चर, इन चार चौघडिय़ाओं को अच्छा माना जाता है और शेष तीन चौघडिय़ाओं- रोग, काल और उद्वेग, को उपयुक्त नहीं माना जाता है.

* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, स्थानीय पंरपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं.

* अपने ज्ञान के प्रदर्शन एवं दूसरे के ज्ञान की परीक्षा में समय व्यर्थ गंवाएं क्योंकि ज्ञान अनंत है और जीवन का अंत है!   

पंचांग

सोमवार, 30 सितंबर 2019

शक सम्वत 1941   विकारी

विक्रम सम्वत 2076

काली सम्वत 5121

दिन काल 11:55:40

मास आश्विन

तिथि द्वितीया - 16:51:32 तक

नक्षत्र चित्रा - 16:29:30 तक

करण बालव - 06:30:34 तक, कौलव - 16:51:32 तक

पक्ष शुक्ल

योग एन्द्र - 12:07:50 तक

सूर्योदय 06:13:15

सूर्यास्त 18:08:56

चन्द्र राशितुला

चन्द्रोदय 07:39:00

चन्द्रास्त 19:34:59

ऋतु शरद

दिशा शूल: पूर्व में

राहु काल वास: उत्तर-पश्चिम में

नक्षत्र शूल: कोई नहीं

चन्द्र वास: पश्चिम में

आज का दिन : ज्योतिष की नज़र में


जानिए कैसा रहेगा आपका भविष्य


खबर : चर्चा में


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