अव्यवस्थित जीवनशैली, तनाव, प्रदूषण आदि कारणों के चलते आज देश का हर चौथा युवा हृदयाघात की दहलीज पर खड़ा है. इनमें आधे से ज्यादा युवा तो अपने रोग के बारे में जानते तक नहीं. बाकी जानकर भी अंजान हो जाते हैं. यही वजह है कि मात्र 10 फीसदी युवा रोगी उपचार के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं. यह जानकारी अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान (आईसीएमआर) की हाल ही में आई एक रिपोर्ट में दी गई है.

रिपोर्ट के अनुसार, देश के प्रत्येक चार में से एक युवा को उच्च रक्तचाप की शिकायत है. यदि ज्यादा दिन तक इसका उपचार नहीं कराया जाए तो हृदय पर बुरा असर पड़ता है. क्षमता से करीब तीन गुना दबाव होने के कारण हृदय की पंपिंग प्रभावित हो जाती है और मरीज हृदयाघात की चपेट में आ जाता है. इसी रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार भी देश के 100 जिलों में उच्च रक्तचाप के रोगियों के लिए निशुल्क जांच आदि राष्ट्रीय कार्यक्रम भी शुरू कर चुकी है.

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में आए दिन ऐसे मामले पहुंच रहे हैं. एम्स के हृदय रोग विभाग के वरिष्ठ डॉ. अंबुज राय बताते हैं कि हृदयरोग और हृदयाघात के कम उम्र में काफी मामले देखने को मिल रहे हैं. इन मरीजों को बचा पाने में डॉक्टरों के आगे सबसे बड़ी चुनौती गोल्डन ऑवर है. विदेशों में हृदयाघात के करीब 2 घंटे के भीतर उपचार मिल जाता है, जबकि भारत में ये करीब 6 घंटे के बाद होता है. यही वजह है, देश में सालाना 30 लाख हृदयाघात के मामलों में से कुछ ही फीसदी को डॉक्टर बचा पाते हैं. 990 में करीब ढाई करोड़ लोग हृदय रोग ग्रस्त थे, जिनकी संख्या अब छह करोड़ से भी ज्यादा है. एम्स के अनुसार, करीब 25 फीसदी सालाना मौत 25 से 65 वर्ष की आयु के बीच हो रही हैं.

हृदयरोगी क्या करें?

भोजन के साथ अदरक, लौंग, लहसुन, सोंठ, काली मिर्च, पीपल, लौंग, तेजपत्ता, सेंधा नमक का उपयोग करें.

तनाव मुक्त व प्रसन्नचित्त रहें और योग, ध्यान तथा प्राणायाम करें, प्रतिदिन पैदल भी चलें.

कम खाएं और एक समय में 80 ग्राम/80 एमएल केलोरिक भोजन से अधिक न लें.

ट्रेडमिल पर चलें तो कोशिश करें कि आपका हार्ट रेट 80 हो.

क्या न करें

चावल, दही, कढ़ी, गोभी, मटर, मूली, उड़द की दाल आदि जैसे शरीर में कफ बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थों से परहेज करें.
मांस, मदिरा, धूम्रपान, अत्यधिक चाय, कॉफी, फास्ट फूड, जंकफूड,  डिब्बाबंद भोजन, खोया, मलाई, मक्खन तथा अंडे की जर्दी, नारियल के

तेल, आइसक्रीम आदि के प्रयोग से बचें.

अधपचे भोजन से आमाशय में सड़न पैदा होती है, जिससे शरीर में विषाक्त पदार्थ की मात्रा बढ़ती है.

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