* भाद्रपद शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा से पितरों का काल आरम्भ हो जाता है और यह सर्वपितृ अमावस्या तक रहता है. 

* वैसे तो अमावस्या पितरों की तिथि है इसलिए अमावस्या पर श्राद्धकर्म किए जाते हैं.  

* सर्वपितृ अमावस्या, पितृपक्ष का विशेष दिन है जब समस्त पितरों के निमित्त श्राद्ध किया जाता है. 

* जो लोग पितृपक्ष के पन्द्रह दिनों तक श्राद्ध, तर्पण आदि नहीं कर पाते हैं और जिन पितरों के निधन की तिथि ज्ञात नहीं हो, किसी कारण से उनकी तिथि पर श्राद्ध नहीं किया गया हो, सर्वपितृ अमावस्या पर ऐसे पितरों का श्राद्ध होता है.

* कई लोग पूर्णिमा, चतुर्दशी आदि के दिन श्राद्ध नहीं करते हैं, वे सर्वपितृ अमावस्या पर श्राद्ध करते हैं.  

* यह पितृपक्ष विदाई की अंतिम तिथि है, इसलिए श्राद्ध विषयक कोई  शंका हो तो अपने क्षेत्र के धर्मगुरु से मार्गदर्शन प्राप्त कर श्राद्धकर्म करें. 

* पितृपक्ष पूर्ण होने पर पितृदेवों की विदाई श्रद्धापूर्वक करें... हे पितृदेवों! हमारे परिवार में दाताओं, वेदों और संतानों की वृद्घि हो, हमारी आप में श्रद्धा कभी भी कम न हो, दान देने के लिए हमारे पास पर्याप्त संपत्ति हो!

* पितृपक्ष समाप्ति के बाद अगले दिन से नवरात्र प्रारंभ होते हैं. 

- आज का राशिफल -

निम्न राशि के लिए उत्तम चन्द्रबलम अगले दिन सूर्योदय तक:

मेष, कर्क, कन्या,
वृश्चिक, धनु, मीन

*कुम्भ राशि में जन्में लोगो के लिए अष्टम चन्द्र

*यहां राशिफल चन्द्र के गोचर पर आधारित है, व्यक्तिगत जन्म के ग्रह और अन्य ग्रहों के गोचर के कारण शुभाशुभ परिणामों में कमी-वृद्धि संभव है, इसलिए अच्छे समय का सद्उपयोग करें और खराब समय में सतर्क रहें.

- शनिवार का चौघडिय़ा -

दिन का चौघडिय़ा       रात्रि का चौघडिय़ा

पहला- काल              पहला- लाभ

दूसरा- शुभ              दूसरा- उद्वेग

तीसरा- रोग              तीसरा- शुभ

चौथा- उद्वेग             चौथा- अमृ

पांचवां- चर               पांचवां- चर

छठा- लाभ                छठा- रोग

सातवां- अमृत            सातवां- काल

आठवां- काल             आठवां- लाभ

* चौघडिय़ा का उपयोग कोई नया कार्य शुरू करने के लिए शुभ समय देखने के लिए किया जाता है 

* दिन का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* रात का चौघडिय़ाअपने शहर में सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* अमृत, शुभ, लाभ और चर, इन चार चौघडिय़ाओं को अच्छा माना जाता है और शेष तीन चौघडिय़ाओं- रोग, काल और उद्वेग, को उपयुक्त नहीं माना जाता है.

* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, स्थानीय पंरपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं.

* अपने ज्ञान के प्रदर्शन एवं दूसरे के ज्ञान की परीक्षा में समय व्यर्थ गंवाएं क्योंकि ज्ञान अनंत है और जीवन का अंत है! 

पंचांग 

शनिवार, 28 सितंबर 2019

सर्वपितृ अमावस्या 

शक सम्वत 1941 विकारी

विक्रम सम्वत 2076

काली सम्वत 5121

दिन काल11:59:03

मास आश्विन

तिथि अमावस्या - 23:58:14 तक

नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी - 22:02:56 तक

करण चतुष्पाद - 13:52:55 तक, नाग - 23:58:14 तक

पक्ष कृष्ण

योग शुक्ल - 20:21:37 तक

सूर्योदय 06:12:13

सूर्यास्त 18:11:17

चन्द्र राशि सिंह - 06:19:21 तक

चन्द्रोदय चन्द्रोदय नहीं

चन्द्रास्त 18:14:00

ऋतु शरद

दिशा शूल: पूर्व में

राहु काल वास: पूर्व में

नक्षत्र शूल: उत्तर में 22:03 तक

चन्द्र वास: दक्षिण मे

आज का दिन : ज्योतिष की नज़र में


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