नजरिया. बिहार में महागठबंधन बिखराव की खबरें आ रही हैं! इसमें आश्चर्य जैसी कोई बात नहीं है, क्योंकि ये तो होना ही था? वैसे भी गठबंधनों का सियासी इतिहास कुछ खास अच्छा नहीं है. देश-प्रदेशों के ऐसे गठबंधन कई बार बने और कई बार बिखर गए, कारण? ये नीति आधारित नहीं, नफा-नुकसान आधारित होते हैं!

बिहार में विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन उपचुनाव के अवसर पर ही बिखराव की प्रक्रिया शुरू हो गई है? खबरें हैं कि प्रदेश के पूर्व सीएम जीतन राम मांझी की पार्टी हम के बाद अब कांग्रेस ने भी महागठबंधन से किनारा करने के संकेत दे दिए हैं. बिहार प्रदेश कांग्रेस ने बड़ा निर्णय करते हुए उपचुनाव में पांच सीटों पर अकेले ही लडनेे का फैसला किया है.

कांग्रेस की प्रदेश चुनाव समिति की बैठक में यह फैसला लिया गया है. कांग्रेस के बिहार प्रभारी सचिव वीरेंद्र सिंह राठौर ने कहना है कि कांग्रेस ने पांचों सीटों पर पैनल तैयार किया है. हमारे सभी कार्यकर्ता पूरे जोश में है. कांग्रेस ड्राइविंग सीट पर ही रहेगी. हमने कुछ दिन भले ही दूसरे को ड्राइवर बना दिया था, लेकिन अब ऐसा नहीं है. पैनल से तैयार पांचों नाम कांग्रेस आलाकमान को भेजे गए हैं और अब आगे का स्वरूप आलाकमान ही तय करेगा! बहरहाल, उपचुनाव के नतीजे कुछ भी हों, लेकिन कांग्रेस अपने दम पर अकेले चुनाव लड़ती है तो उसका सियासी भविष्य बेहतर हो सकता है?

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