यूरोपीय यूनियन (ईयू) की एक शीर्ष अदालत ने मंगलवार को कहा कि अमेरिकी कंपनी गूगल को यूरोप से बाहर अपने सर्च इंजन के लिए ईयू के राइट टू बी फॉरगॉटन यानी भुला दिए जाने के अधिकार को लागू नहीं करना होगा. इस फैसले से गूगल को बड़ी राहत मिली है.यह मामला साल 2014 में दायर किया गया था. इसमें कहा गया था कि लोगों के पास उस समय राइट टू कंट्रोल यानी नियंत्रण का अधिकार होता है जब उनका नाम ऑनलाइन दिखता है. ऐसे में वे गूगल से कह सकते हैं कि वह उनके लिंक को हटा दे. 

इस मामले में याचिकाकर्ता फ्रांस का निजता नियामक चाहता था कि यह अधिकार गूगल के सभी डोमेन में लागू होना हो यहां तक कि ईयू से बाहर भी. लेकिन, अदालत के फैसले से तय हो गया है कि गूगल को भुला दिए जाने के इस अधिकार को ईयू से बाहर लागू नहीं करना होगा.

इंटरनेट क्षेत्र की दिग्गज कंपनी गूगल ने कहा कि ईयू के कानूनों के तहत जरूरी सर्च परिणामों को हटाने की प्रक्रिया को गूगल डॉट कॉम डोमेन या इसकी अन्य गैर यूरोपीय साइट पर लागू नहीं होनी चाहिए. 

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि राइट टू बी फॉरगॉटन के और विस्तार की जरूरत नहीं है. इससे लोगों को ये अधिकार मिलता है कि वे इंटरनेट रिकॉर्ड से अपनी जानकारी, वीडियो या तस्वीरों मिटा सकते हैं, ताकि वे सर्च इंजनों को न मिलें.

अदालत ने कहा कि ईयू के कानूनों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो गूगल जैसे सर्च इंजन ऑपरेटर को इसके सभी संस्करणों के सर्च इंजन के लिए ऐसी व्यवस्था का प्रावधान करने के लिए कहे. गूगल ने अदालत के फैसले का स्वागत किया है.

उसके वकील ने एक बयान में कहा, ये खुशी की बात है कि अदालत हमारी दलीलों से सहमत हुई. साथ ही उन्होंने कहा कि गूगल सूचना पाने के अधिकार और गोपनीयता के अधिकार के बीच एक समझदारी भरा संतुलन बनाने के लिए काम कर रहा है.

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