नई दिल्ली. भारत के पहले प्रोफेशनल बेसबॉल खिलाड़ी बनने का गौरव हासिल करने वाले रिंकू सिंह अब प्रोफेशनल वर्ल्ड रेसलिंग इंटरटेंमेंट (डब्ल्यूडब्ल्यूई) में अपना जलवा बिखेरने के लिए तैयार हैं. बेसबॉल से फ्रोफेशनल रेसलिंग में आने के सवाल पर रिंकू ने आईएएनएस से कहा, बदलाव बहुत बेहतरीन रहा है. जब मैं ट्राईआउट्स में था तो मुझे नहीं पता था कि चीजें कैसी होंगी क्योंकि वहां का माहौल बहुत अलग था जिससे मैं परिचित नहीं था. डब्ल्यूडब्ल्यूई में बेसबॉल से अलग ट्रेनिंग होती है. हालांकि, दूसरे खेल का खिलाड़ी होने के कारण प्रोफेसनल रेसलिंग की तकनीक सीखने के लिए मुझे थोड़ी मेहनत करनी पड़ी, लेकिन मेरा सफर शानदार रहा.

रिंग में रिंकू का लुक भी रेसलिंग फैन्स को काफी पसंद आ रहा है. वह शिव की तरह माथे पर टीका भी लगाकर रखते हैं. रिंकू ने कहा, एक गांव में पैदा होने के कारण मैंने इसी प्रकार की संस्कृति को देखा है. मेरे पूर्वज इन प्रतीक चिन्हों के साथ बड़े हुए हैं. चाहे हम अमेरिका में रहते हैं या कहीं और, भारतीय अपनी संस्कृति और सभ्यता के लिए जाने जाते हैं. भारत में युवा पीढ़ी को इसपर गर्व होना चाहिए. मुझे इस बात पर गर्व महसूस होता है कि अमेरिका में रहने के बावजूद भी मैं सफलतापूर्वक अपने धर्म और संस्कृति का पालन कर सकता हूं.

भारत के एक छोटे से गांव से निकलर अमेरिका में अपना करियर बनाने के लिए रिंकू को कई बड़ी कठिनाईयों का समाना करना पड़ा. रिंकू ने कहा, "सभी को कहीं पहुंचने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है. एक व्यक्ति की पुष्ठभूमि अच्छी न होने का यह मतलब नहीं है कि जीवन में कुछ बड़ा नहीं कर सकता है. मेरे पापा परिवार का अकेले पेट पालते थे और मुझे याद है कि एक बार उनके साथ दुर्घटना हुई जिसके कारण 4-5 दिनों तक मेरे परिवार ने खाना नहीं खाया.

रिंकू ने बताया, मेरी मां को अपने जेवर बेचकर मेरे पापा का इलाज कराना पड़ा और इस घटना ने मेरे ऊपर गहरा प्रभाव डाला. जब मैं 18 साल का हुआ तब मैं अमेरिका आ गया. यहां का माहौल अलग था, लेकिन मैंने कड़ी मेहनत करते हुए सफलता हासिल की. मैं एक डायरी में इन सब चीजों को लिखकर रखता हूं और हर महीने करीब एक बार उसे जरूर पढ़ता हूं ताकि मुझे याद रहे कि यह सब मैं किसके लिए और क्यों कर रहा हूं. सभी यादें मुझे सहज बनाए रखती है और यह बताती है कि आप जीवन में लड़कर कठिन परिस्थितियों से बाहर आ सकते हैं.

एक बेसबॉल खिलाड़ी के रूप में शुरुआत करने वाले रिंकू दो साल के भीतर डब्ल्यूडब्ल्यूई में शिफ्ट हुए. उन्होंने एनक्सटी में मैच भी जीता और उन्हें यकीन है कि अगले छह महीने या एक साल के भीतर वह टीवी पर दिखेंगे. अपने भविष्य के बारे में बात करते हुए रिंकू ने कहा, मेरा सपना रेसलमेनिया में जाना और एक लाख लोगों के सामने भारत को प्रतिनिधित्व करना है. अगर आपको खुद पर भरोसा है तो कुछ भी संभव है. मुझे विश्वास है कि आप मुझे और गौरव गुर्जर को टैग टीम टाइटल जीतकर भारत आते हुए देखेंगे.

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