नयी दिल्ली. सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई) मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि सरकार 59 मिनट ऋण योजना को ज्यादा कारगर बनाने के लिए इसकी समीक्षा कर रही है. उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी का उपयोग बढ़ाकर आयात को कम करने के लिए एक नीति तैयार की जा रही है. इससे एमएसएमई को लाभ होगा. गडकरी ने मंगलवार को सीआईआई के एक कार्यक्रम से इतर संवाददाताओं को बताया कि 59 मिनट में ऋण योजना की समीक्षा की जा रही है, ताकि स्वीकृत किये गये ऋणों का पूरी तरह से वितरण किया जा सके.

बैंकों ने चिंता जतायी थी कि छोटे कारोबारी 59 मिनट में ऋण योजना को लेकर ज्यादा उत्साहित नहीं है. ऐसे में एमएसएमई मंत्री की यह टिप्पणी अहम है. छोटे कारोबारियों के बीच योजना को लेकर जागरूकता कम है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छोटी इकाइयों को बिना किसी दिक्कत और पारदर्शी बैंकिंग के लिए नवंबर, 2018 में यह 59 मिनट ऋण योजना पोर्टल पेश किया था.

योजना की शुरुआत के महज चार महीने से कम समय में 35,000 करोड़ रुपये के कर्ज को इस पोर्टल से स्वीकृति मिल चुकी है. 31 मार्च 2019 तक 50,706 से अधिक आवेदनों को सैद्धांतिक मंजूरी दी जा चुकी है और 27,893 आवेदन को मंजूरी दी जा चुकी है. इस योजना के तहत एक लाख रुपये से पांच करोड़ रुपये तक का ऋण दिया जा रहा है.

गडकरी ने कहा कि सरकार प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करके देश के आयात को कम करने के लिए आयात को कम करने वाली एक नीति तैयार कर रही है. सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री गडकरी ने कहा कि हमने इसे वित्त मंत्रालय को भेज रहे हैं. मुझे लगता है कि यह लाभदायक होगा. यह नीति आयात किये जाने वाले प्रमुख उत्पादों के लिए विशेष समर्थन देगी.

उन्होंने कहा कि एमएसएमई इकाइयां प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करके इन उत्पादों का उत्पादन कर सकती हैं. इससे हम आयात की जगह निर्यातक बन सकते हैं और छोटी एवं मझोली इकाइयां मजबूत होंगी. गडकरी ने कहा कि ज्यादा से ज्यादा एमएसएमई इकाइयों को पूंजी जुटाने के लिए पूंजी बाजार में आना चाहिए. उन्होंने कहा कि इस तरह की करीब 20 कंपनियां ही नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर पंजीकृत हैं और पूंजी बाजार से धन जुटा रही हैं.

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