- प्रदीप कुमार द्विवेदी  

* इंदिरा एकादशी पितृपक्ष की एकादशी होने के कारण पितरों की मुक्ति के लिए श्रेष्ठ मानी जाती है.

* हर एकादशी की तरह पूजा-व्रत नियम एकजैसे ही हैं, मूल भावना यही है कि जानबूझ कर गलती नहीं करें और पवित्र मन से श्रीविष्णुदेव की आराधना करें.

* इस एकादशी पर पितरों के निमत्त यथाशक्ति दानपुण्य करें तो पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है.

* इस एकादशी पर पूजा-व्रत के प्रभाव से पितृदोष समाप्त होता है. 

* धर्मग्रंथों के अनुसार जब धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से इस एकादशी के बारे में जानना चाहा तो इसका महत्व बताते हुए भगवान श्रीकृष्ण ने कहा कि- हे राजन! श्रद्धापूर्वक इसकी कथा सुनो क्योंकि केवल कथा सुनने से ही यज्ञ का शुभफल मिलता है.

* प्राचीन समय में महिष्मति नगरी में राजा  इंद्रसेन धर्मानुसार राज करता था, वह श्रीविष्णुदेव का परम भक्त था. 

* एक दिन ऋषि नारद उसकी सभा में पधारे. 

* राजा ने सादर आसन देने के पश्चात कहा कि- हे ऋषिदेव! कृपा करके अपने आगमन का कारण बताएं, तब ऋषि नारद कहने लगे कि- हे राजन! मैं यमलोक में गया था, वहां तुम्हारे धर्मात्मा पिताश्री को देखकर आश्चर्य हुआ.

* मुझे ज्ञात हुआ कि तुम्हारे पिताश्री एकादशी का व्रत भंग होने के कारण वहां थे. 

* उन्होंने बताया कि यदि मेरा पुत्र इंदिरा एकादशी का व्रत मेरे निमित्त करेगा तो मुझे यहां से मुक्ति मिलेगी. 

* इस पर राजा ने ऋषि नारद के निर्देशानुसार इंदिरा एकादशी का व्रत ेिकया जिससे उसके पिताश्री को मुक्ति मिली और वह पितृऋण से मुक्त हुआ.

* कथा सुनाकर श्रीकृष्ण ने कहा- हे युधिष्ठिर! इंदिरा एकादशी के व्रत का महत्व मैंने तुम्हें बताया. इसके पढऩे-सुनने से मनुष्य सब पापों से मुक्त हो जाते हैं, सब प्रकार के भोगों को भोगकर बैकुंठ को जाते हैं. 

-आज का राशिफल

निम्न राशि के लिए उत्तम चन्द्रबलम अगले दिन सूर्योदय तक:

वृषभ, कर्क, कन्या,
तुला, मकर, कुम्भ

*धनु राशि में जन्में लोगो के लिए अष्टम चन्द्र  

* यहां राशिफल चन्द्र के गोचर पर आधारित है, व्यक्तिगत जन्म के ग्रह और अन्य ग्रहों के गोचर के कारण शुभाशुभ परिणामों में कमी-वृद्धि संभव है, इसलिए अच्छे समय का सद्उपयोग करें और खराब समय में सतर्क रहें.

बुधवार का चौघडिय़ा -

दिन का चौघडिय़ा         रात्रि का चौघडिय़ा

पहला- लाभ               पहला- उद्वेग

दूसरा- अमृत               दूसरा- शुभ

तीसरा- काल              तीसरा- अमृत

चौथा- शुभ                चौथा- चर

पांचवां- रोग              पांचवां- रोग

छठा- उद्वेग              छठा- काल

सातवां- चर              सातवां- लाभ

आठवां- लाभ            आठवां- उद्वेग

* दिन का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* रात का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* अमृत, शुभ, लाभ और चर, इन चार चौघडिय़ाओं को अच्छा माना जाता है और शेष तीन चौघडिय़ाओं- रोग, काल और उद्वेग, को उपयुक्त नहीं माना जाता है.

* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, स्थानीय पंरपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं.

* अपने ज्ञान के प्रदर्शन एवं दूसरे के ज्ञान की परीक्षा में समय व्यर्थ गंवाएं क्योंकि ज्ञान अनंत है और जीवन का अंत है

पंचांग

बुधवार, 25 सितंबर 2019

इन्दिरा एकादशी

एकादशी / द्वादशी श्राद्ध

शक सम्वत 1941 विकारी

विक्रम सम्वत 2076

काली सम्वत 5121

दिन काल 12:04:09

मास आश्विन

तिथि एकादशी - 14:10:35 तक

नक्षत्र पुष्य - 08:52:46 तक

करण बालव - 14:10:35 तक, कौलव - 24:41:03 तक

पक्ष कृष्ण

योग शिव - 12:29:39 तक

सूर्योदय 06:10:42

सूर्यास्त 18:14:51

चन्द्र राशि कर्क

चन्द्रोदय 27:06:00

चन्द्रास्त16:00:59

ऋतु शरद

दिशा शूल: उत्तर में

राहु काल वास: दक्षिण-पश्चिम में

नक्षत्र शूल: कोई नहीं

चन्द्र वास: उत्तर में

आज का दिन : ज्योतिष की नज़र में


जानिए कैसा रहेगा आपका भविष्य


खबर : चर्चा में


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