सदियों की ठंढी-बुझी राख सुगबुगा उठी, मिट्टी सोने का ताज पहन इठलाती है, दो राह, समय के रथ का घर्घर-नाद सुनो, सिंहासन खाली करो कि जनता आती है! भाव, भाषा और व्यवहार, एकजैसा कैसे हो सकता है यह सीखना हो तो राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर (जन्म- 23 सितंबर 1908, निधन- 24 अप्रैल 1974) का जीवन प्रेरणास्पद है. राष्ट्रकवि दिनकर आधुनिक काल के श्रेष्ठ वीर रस के कवि रहे हैं. अलाउद्दीन खिलजी ने जब चित्तौडग़ढ़ पर अधिकार कर लिया, तब राणा अजय सिंह अपने भतीजे हम्मीर और पुत्रों को लेकर अरावली पहाड़ पर कैलवाड़ा के किले में रहने लगे. राजा मुंज ने वहीं पर उनका अपमान किया था, बाद में हम्मीर ने इसका हिसाब चुकता किया! तब हम्मीर की उम्र महज ग्यारह वर्ष की थी.

यही बहादूर बालक हम्मीर बाद में बहुत बड़ा योद्धा निकला जिसके हठ के लिए कहा जाता है कि- तिरिया तेल हमीर हठ चढ़ै न दूजी बार! इस रचना में दिनकर का तेजस्वी रूप निखरा है. बालक हम्मीर कविता राष्ट्रीय गौरव की रचना है. इस कविता की ये पंक्तियां देखिए.. धन है तन का मैल, पसीने का जैसे हो पानी, एक आन को ही जीते हैं इज्जत के अभिमानी! दिनकर का रचना-जीवन सन् 1935 से शुरू हुआ, जब- रेणुका, प्रकाशित हुई और हिन्दी के रचना संसार में एकदम नए तेवर, नए अंदाज में सामने आए! इसके बाद जब- हुंकार प्रकाशित हुई, तो देश के युवा इन रचनाओं से बेहद प्रभावित हुए.

यों तो- कुरुक्षेत्र, दूसरे महायुद्ध के समय की रचना है, लेकिन वह युवा मन के हिंसा-अहिंसा के द्वंद से निकली थी. दिनकर के पहले तीन काव्य-संग्रह प्रमुख हैं- रेणुका (सन् 1935 ), हुंकार (सन् 1938 ) और रसवन्ती (सन् 1939 ) जो उनके आत्म मंथन के काल की रचनाए हैं. कई बार दिनकर को सरकार विरोधी स्वरूप में देखा जाता है लेकिन वास्तव में वे ऐसे इसलिए नजर आते हैं क्योंकि उन्होंने सैद्धान्तिक और प्रायोगिक जीवन में फर्क नहीं किया...वे जैसा सोचते थे, वास्तव में वैसे ही थे. कोई भी सरकार हो उसे स्वतंत्र सोच कम ही पचती है! भारत सरकार द्वारा राष्ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनकरÓ को पद्म भूषण से अंलकृत किया गया तो उनकी सुप्रसिद्ध पुस्तक- संस्कृति के चार अध्याय, के लिये साहित्य अकादमी तथा उर्वशी के लिये ज्ञानपीठ सम्मान-पुरस्कार प्रदान किया गया.

उन्हें कुरुक्षेत्र के लिए इलाहाबाद की साहित्यकार संसद द्वारा भी सन् 1948 में सम्मानित किया गया. अपने समय में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनकरÓ ने जो शब्दबाण चलाए उन्हें सदियों तक याद किया जाता रहेगा, जब भी विद्रोह को शब्दों की जरूरत होगी, क्रांति को आवाज चाहिएगी तो सुनाई देगा...सिंहासन खाली करो कि जनता आती है!

फ्लैश बैक-

23 सितंबर, 1992- यूगोस्लाविया का संयुक्त राष्ट्र संघ से निष्कासन.

23 सितंबर, 1995- ताबा (मिस्र) में इस्रायल एवं फिलिस्तीनी मुक्ति संगठन के मध्य पश्चिमी तट में फिलिस्तीनी स्वशासन के संबंध में समझौता.

23 सितंबर, 2000- सिडनी ओलम्पिक में संयुक्त राज्य अमेरिका की धाविका मैरियन जोन्स ने 100 मीटर दौड़ का स्वर्ण पदक जीता.

23 सितंबर, 2001- ब्रिटिश व तालिबान सेना के बीच गोलाबारी.

२३ सितंबर, 2001- संयुक्त राज्य अमेरिका ने भारत व पाकिस्तान पर से प्रतिबंध हटाये.

23 सितंबर, 2002- जर्मनी के चांसलर गेरहार्ड श्रीएडर फिर से सत्ता में आए.

23 सितंबर, 2003- भूटान में लोकतांत्रिक संविधान का मसौदा तैयार हुआ.

23 सितंबर, 2006- पाकिस्तानी राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने भारतीय प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह को वार्ता का निमंत्रण भेजा.

23 सितंबर, 2009- भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने भारतीय उपग्रह ओशन सैट-2 समेत सात उपग्रह कक्षा में स्थापित किए.

जन्म दिन-

23 सितंबर, १908- रामधारी सिंह 'दिनकरÓ, सुप्रसिद्ध कवि.

पुण्य तिथि-

23 सितंबर, 1983- सर्वेश्वर दयाल सक्सेना, प्रसिद्ध साहित्यकार.

23 सितंबर, 1969-सत्यनारायण शास्त्री, प्रसिद्ध चिकित्साशास्त्री.

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