- प्रदीप कुमार द्विवेदी  

* हर वर्ष आश्विन मास के कृष्ण पक्ष अष्टमी को किया जाने वाला  व्रत है...जीवित्पुत्रिका व्रत. 

* यह व्रत संतान की दीर्घायु और सकुशलता की मनोकामना के लिए महिलाओं द्वारा किया जाता है. 

* महिलाएं प्रात:काल पवित्रस्नान के बाद व्रत संकल्प लेती हैं, संपूर्ण दिवस निर्जला रहकर जीवित्पुत्रिका व्रत करती हैं और व्रतकथा सुनती हैं. 

* यह व्रत अलग अलग क्षेत्रों में अलग अलग नामों- जीतिया, जीउतिया, जिमूतवाहन व्रत आदि, से पुकारा जाता है. 

* विभिन्न क्षेत्रों में इस व्रत की विविध कथाएं हैं जिनका उद्देश्य व्रत का महत्व बताना है. एक कथा इस प्रकार है...

* प्राचीन समय में उदार और परोपकारी जीमूतवाहन गन्धर्व राजकुमार थे जिन्हें अल्पायु में ही राज्य का सिंहासन प्राप्त हो गया था, लेकिन उन्हें वह स्वीकार नहीं था. 

* वे राज्य का कार्यभार अपने भाइयों पर छोड़कर स्वयं वन में पिताश्री की सेवा करने चले गए.

* वहां मलयवती राजकन्या से उनका शुभ विवाह हो गया.

* एक दिन वन में भ्रमण के दौरान जीमूतवाहन ने देखा कि एक वृद्ध औरत विलाप कर रही है. 

* जीमूतवाहन ने वृद्धा की इस परेशानी का कारण पूछा.

* वृद्धा ने रोते हुए बताया कि- मैं नागवंश की औरत हूं और मेरा एक ही पुत्र है. 

* नागवंश ने पक्षीराज गरुड़ के समक्ष प्रतिदिन भक्षण के लिए एक नाग संतान सौंपने की सहमति दी हुई है, जिसके अनुसार आज मेरी ही संतान शंखचूड़ का दिन है. 

* यदि मेरी इकलौती संतान नहीं रही तो मैं किसके सहारे अपना जीवन गुजारूंगी?

* वृद्धा का दर्द सुनकर जीमूतवाहन का दिल भर आया ओर उसने कहा कि- हे माता! तुम्हारी संतान की जगह मैं स्वयं को समर्पित करूंगा.

* अपने वचन के अनुसार जीमूतवाहन ने शंखचूड़ से रक्त वस्त्र ले लिया और उसे लपेटकर गरुड़ के समक्ष प्रस्तुत हो गया.

* पक्षीराज गरुड़ रक्त वस्त्र में ढके जीमूतवाहन को अपने पंजे में दबा कर अपने निवास पर्वत पर ले गया.

* इस बार पक्षीराज गरुड़ की मजबूत पकड़ के दर्द से अप्रभावित प्राणी ने उसे आश्चर्य में डाल दिया और उसने पूछा-  सच सच बताओ तुम कौन हो?

* जीमूतवाहन ने सारा घटनाक्रम पक्षीराज गरुड़ को सुनाया तो वे इस त्याग से बड़े प्रसन्न हुए और उसने जीमूतवाहन को जीवनदान देते हुए कहा कि वह भविष्य में नागवंश की बलि नहीं लेगा.

* इस तरह जीमूतवाहन के साहस से नागवंश की रक्षा हुई. 

* इसी कारण से संतान की सुरक्षा के लिए यह व्रत और पूजा की जाती है. 

* कहते हैं...कैलाश पर्वत पर भगवान भोलेनाथ जब माता पार्वती को यह कथा सुना रहे थे तब उन्होंने कहा कि- इस अष्टमी के दिन व्रत रखकर जो महिला प्रदोषकाल में जीमूतवाहन की पूजा-व्रत करती है वह संतान का संपूर्ण सुख प्राप्त करती है.

- आज का राशिफल -

  निम्न राशि के लिए उत्तम चन्द्रबलम अगले दिन सूर्योदय तक:

मेष, मिथुन, सिंह,

कन्या, धनु, मकर

*वृश्चिक राशि में जन्में लोगो के लिए अष्टम चन्द्र  

* यहां राशिफल चन्द्र के गोचर पर आधारित है, व्यक्तिगत जन्म के ग्रह और अन्य ग्रहों के गोचर के कारण शुभाशुभ परिणामों में कमी-वृद्धि संभव है, इसलिए अच्छे समय का सद्उपयोग करें और खराब समय में सतर्क रहें.

 - रविवार का चौघडिय़ा -

दिन का चौघडिय़ा             रात्रि का चौघडिय़ा

पहला- उद्वेग                पहला- शुभ

दूसरा- चर                   दूसरा- अमृत

तीसरा- लाभ                 तीसरा- चर

चौथा- अमृत                 चौथा- रोग

पांचवां- काल                 पांचवां- काल

छठा- शुभ                    छठा- लाभ

सातवां- रोग               सातवां- उद्वेग

आठवां- उद्वेग                 आठवां- शुभ

* चौघडिय़ा का उपयोग कोई नया कार्य शुरू करने के लिए शुभ समय देखने के लिए किया जाता है. 

* दिन का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* रात का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* अमृत, शुभ, लाभ और चर, इन चार चौघडिय़ाओं को अच्छा माना जाता है और शेष तीन चौघडिय़ाओं- रोग, काल और उद्वेग, को उपयुक्त नहीं माना जाता है.

* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, स्थानीय पंरपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं.

* अपने ज्ञान के प्रदर्शन एवं दूसरे के ज्ञान की परीक्षा में समय व्यर्थ गंवाएं क्योंकि ज्ञान अनंत है और जीवन का अंत है

पंचांग  

रविवार, 22 सितंबर 2019

जीवितपुत्रिका व्रत

अष्टमी श्राद्ध

शक सम्वत1941 विकारी

विक्रम सम्वत2076

काली सम्वत 5121

दिन काल 12:09:14

मास आश्विन

तिथि अष्टमी - 19:52:24 तक

नक्षत्र मृगशिरा - 11:46:31 तक

करण बालव - 08:13:00 तक, कौलव - 19:52:24 तक

पक्ष कृष्ण

योग व्यतीपात - 20:24:08 तक

सूर्योदय 06:09:11

सूर्यास्त 18:18:26

चन्द्र राशि मिथुन

चन्द्रोदय 23:56:00

चन्द्रास्त13:16:00

ऋतु शरद

दिशा शूल: पश्चिम में

राहु काल वास: उत्तर में

नक्षत्र शूल: कोई नहीं

चन्द्र वास: पश्चिम में

आज का दिन : ज्योतिष की नज़र में


जानिए कैसा रहेगा आपका भविष्य


खबर : चर्चा में


************************************************************************************




Disclaimer : इस न्यूज़ पोर्टल को बेहतर बनाने में सहायता करें और किसी खबर या अंश मे कोई गलती हो या सूचना / तथ्य में कोई कमी हो अथवा कोई कॉपीराइट आपत्ति हो तो वह info@palpalindia.com पर सूचित करें। साथ ही साथ पूरी जानकारी तथ्य के साथ दें। जिससे आलेख को सही किया जा सके या हटाया जा सके ।