धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व के कई घरोहरों के लिए फेमस मिथिला क्षेत्र उत्तर बिहार के बड़े भूभाग में फैला हुआ है. साथ ही पड़ोसी देश नेपाल का एक बड़ा हिस्सा भी मैथिल संस्कृति से जुड़ा हुआ है. माना जाता है कि त्रेता युग में इसी क्षेत्र में माता सीता का जन्म हुआ था. माता सीता के यह क्षेत्र विश्व भर में प्रसिद्ध है. लेकिन इस इलाके में ऐसे कई धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल है, जिनके बारे में आपको जरूर जानना चाहिए.

माना जाता है कि त्रेता युग में यह मिथिला की राजधानी थी. मां सीता के पिता महाराजा जनक यहां राज करते थे. भगवान राम की शादी सीता से यहीं हुई थी. नेपाल में स्थित जनकपुर हिंदुओं का बड़ा तीर्थस्थल है.

यह दरभंगा रियासत की पुरानी राजधानी रही है. दरभंगा महाराज के पुराने महलों के भग्नावशेष यहां की ऐतिहासिक समृद्धि का आज भी बखान करते नजर आते हैं. हालांकि, अनदेखी से यहां के महल अब खंडहर हो चले हैं. यह बिहार के मधुबनी में स्थित है.

यह दरभंगा रियासत की पुरानी राजधानी रही है. दरभंगा महाराज के पुराने महलों के भग्नावशेष यहां की ऐतिहासिक समृद्धि का आज भी बखान करते नजर आते हैं. हालांकि, अनदेखी से यहां के महल अब खंडहर हो चले हैं. यह बिहार के मधुबनी में स्थित है.

दरभंगा महाराज ने जब राजनगर से अपनी राजधानी हटाई तो दरभंगा में किला और कई महलों का निर्माण किया. लाल ईंटों से बना यह किला देश के चंद आकर्षक किलों में से एक है. किले में नरगौना पैलेस, आनंदबाग महल और बेला महल प्रमुख है.

मधुबनी जिला स्थित बिस्फी कवि कोकिल विद्यापति की जन्मस्थली है. उन्होंने यहां पर ही संस्कृत और मैथिली में कई ग्रंथों व गीतों की रचना की. कहते हैं कि विद्यापति के भक्तिभाव से अभिभूत होकर भगवान शंकर उगना बन कर उनके यहां चाकरी करने आए थे.

बिहार के सीतामढ़ी जिले में स्थित पुनौरा धाम माता सीता का प्राकट्य स्थल है. हल चलाते समय राजा जनक को इसी जगह पर सीता मिली थीं. पिछले दिनों यहां विकास के काफी कार्य हुए हैं.

मधुबनी जिला के बाबूबरही प्रखंड में बलिराजगढ़ का प्राचीन किला और गढ़ है. यह आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया द्वारा संरक्षित स्थल है और इसे राजा बलि के गढ़ के रूप में जाना जाता है. पांच चरणों में यहां हुई खुदाई में तीन हजार साल पुरानी सामग्री मिली थी.

दरभंगा जिला के जाले प्रखंड में अहिल्या स्थान स्थित है. माना जाता है कि अपने पति गौतम के श्राप से अहिल्या पत्थर बन गई थीं तो यहीं भगवान राम के चरण स्पर्श से उनका उद्धार हुआ था. रामचरित मानस में तुलसीदास और रामायण में वाल्मिकी ने इस भूमि को काफी पावन बताया है. यहीं से कुछ दूर स्थित ब्रह्मपुर गौतम ऋषि से जुड़ा स्थान है. यह भारत सरकार द्वारा विकसित हो रहे रामायण सर्किट का हिस्सा है.

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