नयी दिल्ली. भारतीय अर्थव्यवस्था के बारे में यह प्रचलित है कि यहां के लोग घरेलू बचत को लेकर जागरुक हैं. ऐसे में यहां की इकॉनमी गंभीर से गंभीर संकट में खड़ी रहती है. हालांकि अब इसक जानिब भी खतरा मंडरा रहा है. बीते पांच साल में भारतीयों की देनदारी 58 प्रतिशत बढ़कर 7.4 लाख करोड़ रुपए हो गई है. साल 2017 में यह बढ़ोत्तरी सिर्फ 22 प्रतिशत थी.

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की रिसर्च विंग की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है. रिसर्च के अनुसार बीते पांच साल में भारतीय परिवारों पर कर्ज दोगुना हुआ है. वहीं खर्च करने वाली आमदनी में सिर्फ डेढ़ गुना की बढ़ोतरी हुई है.

रिपोर्ट के अनुसार इसके चलते देश की कुल बचत में 4 फीसदी की गिरावट आई है. यह पहले 34.6 फीसदी थी जो अब घटकर 30.5 फीसदी हो गया है.

बचत में गिराव

बचत में गिरावट की सबसे बड़ी वजह है घरेलू स्तर पर बचावत में कमी आई है. बीते पांच सालों में परिवारों के बचत की जीडीपी 6 प्रतिशत गिरी है. साल 2012 में जो घरेलू बचत दर 23.6 फीसदी थी वह साल 2018 में गिरकर 17.2 फीसदी तक सिमट गई.

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के मुताबिक लोन रेट कम करने से ही इसका समाधाना नहीं निकलेगा बल्कि सरकार को कुछ और कदम उठाने होंगे. बैंक ने शोध में कहा है कि कैपिटल गेन टैक्स को हटाने के बाद साल 2018 में इसका असर तो दिखा लेकिन साल 2019 में असर भी कम हो गया है.

ग्रामीण क्षेत्र में मांग बढ़ाए सरकार

बैंक का दावा है कि ग्रामीण क्षेत्र में सरकार को मांग बढ़ाने पर जोर देना होगा. किसानों के लिए शुरु की गई आर्थिक मदद की स्कीम को में आवंटन को टार्गेट तक पहुंचा कर ग्रामीण मांग बढ़ाई जा सकती है.

रिसर्च के अनुसार निजी निवेश में भी कमी आई है. साल 2007 से साल 2014 तक 50 फीसदी रहने वाला निवेश अब साल 2014 से साल 2019 तक सिर्फ 30 फीसदी पर सिमट गया है.

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