इंदौर. फसल वर्ष 2019-20(अक्टूबर-सितंबर) में शकर का उत्पादन 20 प्रतिशत घटने का अनुमान लगाया गया है. यदि यह अनुमान सही साबित हुआ तो देश में शकर का उत्पादन पिछले तीन वर्षों के न्यूनतम स्तर पर आ जाएगा.

शकर उद्यमियों का स्पष्ट कहना है कि पिछले साल सूखे के चलते किसानों ने गन्ने की खेती अपेक्षाकृत कम की थी और इस बार गन्ने की उपज वाले प्रमुख क्षेत्रों में जरूरत से ज्यादा पानी की वजह से फसल को व्यापक नुकसान हुआ है.

चालू फसल सत्र की तुलना में अगले शकर फसल सत्र में महाराष्ट्र और कर्नाटक की गन्ने की फसल को देखते हुए कुल उत्पादन 20 प्रतिशत घटकर 263 लाख टन रहने का अनुमान इन राज्यों के शकर संगठन लगा रहे हैं.

लेकिन, इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) ने 282 लाख टन शकर उत्पादन का अनुमान लगाया है. मौजूदा सत्र में कुल शकर उत्पादन 330 लाख टन रहा था. पिछले सत्र में 360 लाख टन शकर का उत्पादन हुआ था.

पिछले महीने लगातार बरसात के चलते महाराष्ट्र और कर्नाटक में गन्ने की फसल व्यापक रुप से प्रभावित हुई है. चालू वर्ष की तुलना में अगले सत्र में महाराष्ट्र में शकर उत्पादन लगभग आधा घटकर 55 लाख टन रह जाने की आशंका है.

वहीं कर्नाटक में उत्पादन 23 प्रतिशत घटकर 33 लाख टन रहने की आशंका जताई गई है. महाराष्ट्र देश का दूसरा सबसे बड़ा शकर उत्पादक है और कर्नाटक इस मामले में तीसरे पायदान पर है. उत्तर प्रदेश में आम तौर पर सबसे ज्यादा शकर का उत्पादन होता है.

160 लाख टन का अतिरिक्त स्टॉक

केंद्र सरकार गन्ना किसानों का बकाया कम करने और शकर का बढ़ता भंडार घटाने के लिए शकर मिलों को निर्यात प्रोत्साहन दे रही है. इसके तहत 2019-20 के दौरान 60 लाख टन शकर निर्यात का लक्ष्य रखा गया है. ऐसे नीतिगत कदम से शकर मिलों को निर्यात ऑर्डर मिलेगा और भंडारण कम करने में मदद मिलेगी.

फिलहाल भारत दुनिया के सबसे बड़े शकर उत्पादक देशों में शुमार है. पिछले दो वर्षों से देश में शकर का उत्पादन खपत से अधिक होने और उस हिसाब से निर्यात न होने के चलते भारत में शकर का अतिरिक्त भंडारण 160 लाख टन से अधिक बताया जा रहा है.

कुछ निर्यातकों में उत्साह

शकर की कुल उपलब्धता घटने के साथ केंद्र सरकार की तरफ से अगले सत्र के लिए शकर निर्यात का कोटा बढ़ाकर 60 लाख टन किए जाने और इस पर सबसिडी 10 रुपए से बढ़ाकर 13 रुपए प्रति किलो किए जाने से कुछ निर्यातक काफी उत्साहित हैं.

सरकार की मंशा इसके जरिए मिलों का गन्ना किसानों पर चला आ रहा उधार चुकाने की है. लेकिन, जिस तरह से शकर मिलें सीमित निर्यात कर पा रही हैं, उससे कुछ ही मिलों को मोटे मुनाफे के आसार हैं.

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