धर्मग्रंथों के अनुसार पितृपक्ष में पितृ धरती पर रहते हैं... इस दौरान सपनों में पितृ नजर आएं तो डरे नहीं, यह समझें कि पितृ आपसे विशेष लगाव रखते हैं और उन्होंने कुछ संदेश देने के लिए आपको पात्र माना है! 

यदि वे प्रसन्न होकर कुछ निर्देश प्रदान करें तो उसके अनुरूप यथासंभव प्रयास करें... यदि क्रोध करें तो उनकीे अधुरी इच्छाएं यथाशक्ति पूर्ण करें... चाहे किसी भी रूप में सपने में पितृ दिखाई दें और कुछ समझ में नहीं आए तो उनके निमित्त दानपुण्य करें.   

यदि संभव हो तो दोपहर में पीपल को जल चढ़ाएं, मौली लपेटें, जनेऊ अर्पण करके... धूप-दीप, नैवेद्य, खीर आदि का भोग लगाकर नमस्कार करें. इसके पश्चात पीपल पर सूत लपेटते हुए सर्व पितर दोष निवारण मन्त्र का जाप करते हुए परिक्रमा करें... अपने पितरों को सम्मान से प्रणाम करें... ओम सर्व पितृदेवताभ्यो नमः!

- आज का राशिफल -

निम्न राशि के लिए उत्तम चन्द्रबलम 28:23 तक:

वृषभ, मिथुन, कन्या,

तुला, मकर, मीन

*सिंह राशि में जन्में लोगो के लिए अष्टम चन्द्र

उसके पश्चात -

निम्न राशि के लिए उत्तम चन्द्रबलम अगले दिन सूर्योदय तक:

मेष, मिथुन, कर्क,

तुला, वृश्चिक, कुम्भ

*कन्या राशि में जन्में लोगो के लिए अष्टम चन्द्र  

* यहां राशिफल चन्द्र के गोचर पर आधारित है, व्यक्तिगत जन्म के ग्रह और अन्य ग्रहों के गोचर के कारण शुभाशुभ परिणामों में कमी-वृद्धि संभव है, इसलिए अच्छे समय का सद्उपयोग करें और खराब समय में सतर्क रहें. 

सोमवार का चौघडिय़ा -

दिन का चौघडिय़ा      रात्रि का चौघडिय़ा

पहला- अमृत             पहला- चर

दूसरा- काल              दूसरा- रोग

तीसरा- शुभ              तीसरा- काल

चौथा- रोग               चौथा- लाभ

पांचवां- उद्वेग           पांचवां- उद्वेग

छठा- चर                छठा- शुभ

सातवां- लाभ            सातवां- अमृत

आठवां- अमृत            आठवां- चर

* चौघडिय़ा का उपयोग कोई नया कार्य शुरू करने के लिए शुभ समय देखने के लिए किया जाता है. 

* दिन का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* रात का चौघडिय़ाअपने शहर में सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* अमृत, शुभ, लाभ और चर, इन चार चौघडिय़ाओं को अच्छा माना जाता है और शेष तीन चौघडिय़ाओं- रोग, काल और उद्वेग, को उपयुक्त नहीं माना जाता है.

* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, स्थानीय पंरपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं.

* अपने ज्ञान के प्रदर्शन एवं दूसरे के ज्ञान की परीक्षा में समय व्यर्थ गंवाएं क्योंकि ज्ञान अनंत है और जीवन का अंत है!   

पंचांग

सोमवार, 16 सितंबर 2019

शक सम्वत 1941 विकारी

विक्रम सम्वत2076

काली सम्वत 5121

दिन काल 12:19:24

मास आश्विन

तिथि द्वितीया - 14:37:25 तक

नक्षत्र रेवती - 28:22:15 तक

करण गर - 14:37:25 तक, वणिज - 27:38:15 तक

पक्ष कृष्ण

योग वृद्धि - 22:51:26 तक

सूर्योदय 06:06:15

सूर्यास्त 18:25:39

चन्द्र राशि मीन - 28:22:15 तक

चन्द्रोदय 19:55:00

चन्द्रास्त 07:42:00

ऋतु शरद

दिशा शूल: पूर्व में

राहु काल वास: उत्तर-पश्चिम में

नक्षत्र शूल: कोई नहीं

चन्द्र वास: उत्तर में 28:23 तक,पूर्व में 28:23 से

आज का दिन : ज्योतिष की नज़र में


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