अमेरिका के कई शहरों में हैकरों ने स्थानीय सरकारों की कंप्यूटर प्रणालियों को निशाना बनाया है और सरकारें उनके सामने एकदम असहाय नजर आ रही हैं. इतनी असहाय कि उनमें से बहुतों ने अपना डेटा हैकरों की कैद से छुड़ाने के लिए करोड़ों रुपयों की फिरौती अदा की है. फिलहाल भारत में ऐसे मामले सामने नहीं आए हैं, लेकिन अगर हमारी सरकारें चाहें तो अमेरिका के अनुभवों से लाभ उठाकर अपनी कंप्यूटर सुरक्षा को चाक-चौबंद कर सकती हैं.

अमेरिका में हैकरों के ये हमले शहरी प्रशासन, राज्य सरकारों आदि के कंप्यूटरों, सर्वरों, डेटाबेस आदि को निशाना बना रहे हैं. ये रैन्समवेयर अटैक हैं जिनके तहत हैकर आपके कम्प्यूटरों तक पहुंच हासिल करने के बाद उनमें मौजूद सारा डेटा एनक्रिप्ट कर देते हैं. मतलब यह कि वे तमाम फाइलों और सूचनाओं को इस तरह बदल देते हैं कि उन्हें एक खास कुंजी मिलने पर ही दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है.

समझिए कि आपकी हर फाइल पर ताला लगा दिया गया हो और उसकी चाबी सैकड़ों हजारों किलोमीटर दूर बैठे किसी अपराधी के पास हो. एनक्रिप्शन हटाने के लिए जिस कुंजी या चाबी की ज़रूरत है, वह सौंपने के लिए हैकरों की तरफ से भारी-भरकम धन की मांग की जाती है. हाल ही में अमेरिका के फ्लोरिडा प्रांत की दो स्थानीय सरकारों ने अपना डेटा छुड़ाने के लिए हैकरों को 11 लाख डॉलर (करीब आठ करोड़ रुपए) का भुगतान किया है. अमेरिका में हुए ज्यादातर रैन्समवेयर हमलों में रयुक (Ryuk) नामक मैलवेयरों का हाथ है.

फ्लोरिडा के जो दो शहर हैकरों का निशाना बने, वे हैं- रिवियेरा बीच और लेक सिटी. लेकिन ये कोई अकेले शहर नहीं हैं जिनकी सरकारों को हैकरों के सामने घुटने टेकने पड़े. इंडियाना की ला पोर्ते काउंटी के अधिकारियों ने भी 1.3 लाख डॉलर की फिरौती अदा करने की बात स्वीकार की है. न्यूयॉर्क के अल्बानी नामक स्थान पर अप्रैल में सरकारी सिस्टमों को हैक करके पंगु बना दिया गया था.

अनेक सरकारें ऐसे मामलों में भुगतान की बात छिपा जाती हैं. वजह साफ है- नागरिकों के सवालों के जवाब कौन देगा कि जब सरकारें खुद अपनी साइबर सुरक्षा में सक्षम नहीं हैं तो वे हमारी सुरक्षा कैसे करेंगी? सन् 2018 में अमेरिका में 170 स्थानीय सरकारों के संस्थान रैन्समवेयर हमलों की चपेट में आए थे. फ्रांस में तो हालात और भी बुरे थे जहां यह संख्या 560 थी.

सच कहा जाए तो सरकारें और सरकारी संगठन ऐसे तत्वों के लिए ज्यादा आसान निशाना हैं. अमेरिका समेत दुनिया भर की सरकारों के दफ्तरों में पुराने जमाने के हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर चल रहे हैं. सिस्टम अपग्रेड करने में होने वाला खर्च अक्सर टाल दिया जाता है. साइबर विशेषज्ञों और साइबर सुरक्षा प्रणालियों पर खर्च भी अक्सर प्राथमिकता में नहीं होता. स्टाफ कम होता है और जो है उसकी जानकारी सीमित होती है. सरकारों के पास ही तो सबसे ज्यादा संवेदनशील डेटा मौजूद है और अनगिनत प्रशासनिक प्रणालियों का नियंत्रण भी वहीं पर है. अगर कोई साइबर हमला हुआ तो सब कुछ ठप्प हो जाने का खतरा रहता है

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