मुद्दा. राजस्थान के राज्यपाल रहे कल्याण सिंह मार्च 2019 में मोदी को फिर से पीएम बनवाने के इरादे जाहिर करके सियासी विवाद में आ गए थे और उन्हें हटाए जाने की चर्चाएं भी थी, लेकिन बाद में यह मामला ठंडा पड़ गया.

कल्याण सिंह का कार्यकाल 3 सितंबर 2019 को पूरा हो गया और उनकी जगह कलराज मिश्र को राजस्थान का राज्यपाल नियुक्त किया गया. पिछले पचास से ज्यादा वर्षों में कल्याण सिंह ऐसे इकलौते राज्यपाल रहे हैं, जिन्होंने अपने पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा किया है.

इधर, कलराज मिश्र ने जयपुर में सोमवार को राज्यपाल पद की शपथ ग्रहण करने के बाद प्रेस से कहा कि- आपसे कई वर्षों पुरानी मुलाकात है, लेकिन आज की मुलाकात अलग है. पहले मैं किसी पार्टी के लिए काम कर रहा था, परंतु आज राज्यपाल के रूप में संवैधानिक पद पर हूं. मैंने सभी राजनीतिक पदों से इस्तीफा दे दिया है. अब जो भी काम होंगे वे संविधान के आधार पर होंगे.

उधर, राजस्थान के पूर्व राज्यपाल और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने लखनऊ में बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की. बीजेपी के यूपी प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलवाई. इसके साथ ही वे अपने पुराने सियासी तेवर में आ गए हैं.

माना जा रहा है कि अब अगले यूपी विधानसभा चुनाव और राम मंदिर आंदोलन को लेकर उनकी भूमिका फिर से महत्वपूर्ण हो जाएगी.

उल्लेखनीय है कि वे राज्यपाल के पद पर रहते हुए भी अपनी राजनीतिक विचारधारा से मुक्त नहीं हो पाए थे. उन्होंने राजस्थान के राज्यपाल रहते हुए 23 मार्च 2019 को अलीगढ़ दौरे के दौरान स्वयं को भाजपा का कार्यकर्ता करार देते हुए मोदी को फिर से पीएम बनने की इच्छा व्यक्त की थी!

कल्याण सिंह, इस ऐलान के साथ कि- मेरा तन टायर नहीं, मन रिटायर नहीं, फिर से सक्रिय राजनीति में लौट आए हैं. इसीलिए, बड़ा सवाल है कि वे बीजेपी का वर्तमान सियासी समीकरण संवारेंगे या बिगाड़ेंगे?

अब तक, केन्द्र में पीएम नरेन्द्र मोदी का और यूपी में सीएम योगी का राजनीतिक एकाधिकार रहा है, कल्याण सिंह, किसका फायदा करेंगे और किसके लिए राजनीतिक परेशानी का सबब बनेंगे, यह अभी साफ नहीं है.

अलबत्ता, यूपी में बीजेपी की राजनीति में खासा सियासी उबाल है. सवाल तो यह भी है कि वे सत्ता की राजनीति में दिलचस्पी रखेंगे या संगठन की सियासत करेंगे. वे बैकवर्ड क्लास में आने वाली लोध राजपूत जाति का प्रतिनिधित्व करते हैं और यूपी विधानसभा चुनाव करीब आते जा रहे हैं, लिहाजा इस नए पाॅवर सेंटर के साथ बीजेपी का केन्द्रीय नेतृत्व कैसे सियासी संतुलन कायम करेगा, यह देखना भी दिलचस्प होगा.

कल्याण सिंह को सक्रिय राजनीति से दूर रखने के इरादे से ही उन्हें राज्यपाल बनाया गया था, किन्तु गैर-राजनीतिक सत्ता उन्हें रास नहीं आई. उनके पुत्र इस वक्त लोकसभा के सदस्य हैं, तो पौत्र यूपी की योगी सरकार में मंत्री. वर्ष 2014 में केंद्र में पीएम मोदी सरकार के आने पर उन्हें राजस्थान का राज्यपाल बनाया गया था.

वैसे, सत्ता के लिए पीएम मोदी की आदर्श सैद्धान्तिक नीतियां... वंशवाद विरोध, 75 पार सत्ता से सेवानिवृत्त आदि कल्याण सिंह की राजनीतिक राह के रोडे जरूर हैं, लेकिन सिंह स्वतंत्र सियासत में सिद्धहस्त हैं, लिहाजा आनेवाले सियासी समय में यह सवाल कायम रहेगा कि- कल्याण सिंह, बीजेपी का वर्तमान सियासी समीकरण संवारेंगे या बिगाड़ेंगे?

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