प्रदीप द्विवेदी ( WhatsApp- 8302755688).  

*श्रीगणेश विसर्जन को लेकर अनेक धर्मधारणाएं हैं.

*छत्रपति शिवाजी महाराज ने अपने शासन काल में सार्वजनिक श्रीगणेश पूजन की शुरूआत की थी, तो देश के महान नेता लोकमान्य तिलक ने देश को एकसूत्र में बांधने के अवसर स्वरूप गणेशोत्सव प्रारंभ किया था.

*धर्मधारणा के अनुसार महर्षि वेदव्यास, महाभारत की कथा सुनाने के बाद उपजे भगवान श्रीगणेश के तापमान को शांत करने के लिए उन्हें पास के सरोवर तक ले गए थे.

*क्योंकि, वेदव्यास ने गणेश चतुर्थी के दिन से भगवान गणेश को महाभारत की कथा सुनानी प्रारंभ की थी और निरंतर दस दिन तक बगैर विश्राम श्रीगणेश कथा लिखते रहे, जिसके कारण श्रीगणेश के तन का तापमान अत्यधिक बढ़ गया.

*श्रीगणेश के तन का तापमान कम करने के लिए वेदव्यास उन्हें सरोवर तक ले गए और शीतलस्नान कराया, उस दिन अनंत चर्तुदशी थी, इसलिए तभी से श्रीगणेश प्रतिमा का विसर्जन करने की धार्मिक परंपरा प्रारंभ हो गई.

*श्रद्धालु गणपति बप्पा को श्रीगणेश चतुर्थी पर स्वागत-सत्कार के साथ लेकर आते हैं, दस दिन तक उनकी सेवा-पूजा करते हैं और अनंत चतुर्दशी के दिन विसर्जित करते हैं!

- आज का राशिफल -

निम्न राशि के लिए उत्तम चन्द्रबलम अगले दिन सूर्योदय तक:

मेष, वृषभ, सिंह,
कन्या, धनु, कुम्भ

*कर्क राशि में जन्में लोगो के लिए अष्टम चन्द्र  

* यहां राशिफल चन्द्र के गोचर पर आधारित है, व्यक्तिगत जन्म के ग्रह और अन्य ग्रहों के गोचर के कारण शुभाशुभ परिणामों में कमी-वृद्धि संभव है, इसलिए अच्छे समय का सद्उपयोग करें और खराब समय में सतर्क रहें.

गुरुवार का चौघडिय़ा -

दिन का चौघडिय़ा      रात्रि का चौघडिय़ा

पहला- शुभ             पहला- अमृत

दूसरा- रोग              दूसरा- चर

तीसरा- उद्वेग           तीसरा- रोग

चौथा- चर              चौथा- काल

पांचवां- लाभ           पांचवां- लाभ

छठा- अमृत            छठा- उद्वेग

सातवां- काल           सातवां- शुभ

आठवां- शुभ           आठवां- अमृत

* चौघडिय़ा का उपयोग कोई नया कार्य शुरू करने के लिए शुभ समय देखने के लिए किया जाता है 

* दिन का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* रात का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* अमृत, शुभ, लाभ और चर, इन चार चौघडिय़ाओं को अच्छा माना जाता है और शेष तीन चौघडिय़ाओं- रोग, काल और उद्वेग, को उपयुक्त नहीं माना जाता है.

* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, स्थानीय पंरपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं.

* अपने ज्ञान के प्रदर्शन एवं दूसरे के ज्ञान की परीक्षा में समय व्यर्थ गंवाएं क्योंकि ज्ञान अनंत है और जीवन का अंत है! 

पंचांग

गुरुवार, 12 सितंबर 2019

अनन्त चतुर्दशी

गणेश विसर्जन

शक सम्वत1941  विकारी

विक्रम सम्वत 2076

काली सम्वत 5121दिन काल 12:26:09

मास भाद्रपद

तिथि चतुर्दशी - पूर्ण रात्रि तक

नक्षत्र धनिष्ठा - 16:58:26 तक

करण गर - 18:22:41 तक

पक्ष शुक्ल

योग सुकर्मा - 19:31:37 तक

सूर्योदय 06:04:17

सूर्यास्त 18:30:27

चन्द्र राशि कुम्भ

चन्द्रोदय 17:47:00

चन्द्रास्त 29:06:00

ऋतु शरद

दिशा शूल: दक्षिण में

राहु काल वास: दक्षिण में

नक्षत्र शूल: कोई नहीं

चन्द्र वास: पश्चिम में

आज का दिन : ज्योतिष की नज़र में


जानिए कैसा रहेगा आपका भविष्य


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