प्रदीप द्विवेदी ( WhatsApp- 8302755688).  

* भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी जलझूलनी एकादशी कहलाती है जिसे परिवर्तिनी एकादशी, डोल ग्यारस आदि से भी जाना जाता है. 

* इस दिन भगवान श्रीविष्णु करवट बदलते हैं इसीलिए यह परिवर्तनी एकादशी कहलाती है जिसके व्रत से वाजपेय यज्ञ के तुल्य शुभफल की प्राप्ति होती है. 

* इस दिन भगवान श्रीविष्णु के वामन स्वरूप की पूजा की जाती है तो कई जगहों पर भगवान श्रीकृष्ण के सूरज पूजा के स्मरणार्थ विविध धार्मिक आयोजन- शोभायात्रा, पवित्र सरोवर में प्रतिमा स्नान, भजन-कीर्तन आदि होते हैं. 

* इस दिन भगवान श्रीकृष्ण सहित देवी-देवताओं को नौका विहार कराया जाता है और जलझूलनी उत्सव मनाया जाता है.

* श्रद्धालु जलझूलनी शोभायात्रा के दर्शन करते हैं, चढ़ावा चढ़ाते हैं और दान-धर्म करते हैं.

* एकादशी के दिन प्रात:काल पवित्र स्नान आदि करने के बाद स्वच्छ कपड़े पहनकर भगवान वामन की प्रतिमा के सामने बैठकर व्रत का संकल्प लें, उनकी पूजा-अर्चना करें और भगवान वामन की कथा सुनें.

* इस दिन यथासंभव उपवास करें, उपवास में अन्न ग्रहण नहीं करें. 

* धर्मग्रंथों के अनुसार इस व्रत के बारे में भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर से कहा था कि जो इस दिन भगवान का कमल से पूजन करते हैं, वे अवश्य भगवान को प्रिय होते हैं और जिसने व्रत-पूजन किया वे तीनों लोकों में सम्मान पाते हैं! 

* राजा बलि कथा...त्रेतायुग में बलि नामक एक दानव राजा था. वह श्रीविष्णुदेव का परम भक्त था. उसने इंद्रलोक तथा सभी देवताओं को जीत लिया. 

* सभी देवता एकत्र होकर भगवान श्रीविष्णुदेव के पास गए तब भगवान ने वामन स्वरूप पांचवां अवतार लिया. 

* भगवान ने वामन स्वरूप में राजा बलि से तीन पग भूमि की याचना की जिस पर राजा बलि ने तीन पग भूमि प्रदान कर दी.

* एक पग से पृथ्वी तो दूसरे से स्वर्गलोक पूर्ण हो गए तो भगवान ने पूछा कि अब तीसरा पग कहां रखूं?

* राजा बलि ने अपना सिर झुका लिया और भगवान ने अपना पैर उसके मस्तक पर रख दिया जिससे वह पाताल को चला गया. 

* राजा बलि की विनती और नम्रता को देखकर भगवान वामनदेव ने   कहा कि- हे बलि! मैं सदैव तुम्हारे पास ही रहूंगा. 

* भाद्रपद शुक्ल एकादशी के दिन बलि के आश्रम पर भगवान श्रीविष्णुदेव की प्रतिमा स्थापित हुई.

* एकादशी के अवसर पर तांबा, चांदी, चावल, दही आदि का यथाशक्ति दान करना चाहिए और रात्रि को जागरण, भजन-कीर्तन करना चाहिए.

* रियल एस्टेट के कारोबार में कामयाबी के लिए नियमितरूप से श्रीविष्णु देव के वामन स्वरूप की पूजा-अर्चना करें!

- आज का राशिफल -

निम्न राशि के लिए उत्तम चन्द्रबलम 15:13 तक:

मिथुन, कर्क, तुला,
धनु, कुम्भ, मीन

*वृषभ राशि में जन्में लोगो के लिए अष्टम चन्द्र

उसके पश्चात -

निम्न राशि के लिए उत्तम चन्द्रबलम अगले दिन सूर्योदय तक:

मेष, कर्क, सिंह,
वृश्चिक, मकर, मीन

*मिथुन राशि में जन्में लोगो के लिए अष्टम चन्द्र  

* यहां राशिफल चन्द्र के गोचर पर आधारित है, व्यक्तिगत जन्म के ग्रह और अन्य ग्रहों के गोचर के कारण शुभाशुभ परिणामों में कमी-वृद्धि संभव है, इसलिए अच्छे समय का सद्उपयोग करें और खराब समय में सतर्क रहें. 

सोमवार का चौघडिय़ा -

दिन का चौघडिय़ा          रात्रि का चौघडिय़ा

पहला- अमृत                 पहला- चर

दूसरा- काल                  दूसरा- रोग

तीसरा- शुभ                 तीसरा- काल

चौथा- रोग                   चौथा- लाभ

पांचवां- उद्वेग               पांचवां- उद्वेग

छठा- चर                     छठा- शुभ

सातवां- लाभ                सातवां- अमृत

आठवां- अमृत                 आठवां- चर

* चौघडिय़ा का उपयोग कोई नया कार्य शुरू करने के लिए शुभ समय देखने के लिए किया जाता है. 

* दिन का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* रात का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* अमृत, शुभ, लाभ और चर, इन चार चौघडिय़ाओं को अच्छा माना जाता है और शेष तीन चौघडिय़ाओं- रोग, काल और उद्वेग, को उपयुक्त नहीं माना जाता है.

* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, स्थानीय पंरपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं.

* अपने ज्ञान के प्रदर्शन एवं दूसरे के ज्ञान की परीक्षा में समय व्यर्थ गंवाएं क्योंकि ज्ञान अनंत है और जीवन का अंत है!   

पंचांग

सोमवार, 9 सितंबर 2019

परिवर्तिनी एकादशी

शक सम्वत1941  विकारी

विक्रम सम्वत 2076

काली सम्वत 5121

दिन काल 12:31:11

मास भाद्रपद

तिथि एकादशी - 24:32:57 तक

नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा - 08:36:26 तक

करण वणिज - 11:34:45 तक, विष्टि - 24:32:57 तक

पक्ष शुक्ल

योग सौभाग्य - 17:04:52 तक

सूर्योदय 06:02:50

सूर्यास्त18:34:01

चन्द्र राशिधनु - 15:12:37 तक

चन्द्रोदय 15:46:00

चन्द्रास्त 26:25:00

ऋतु शरद

दिशा शूल: पूर्व में

राहु काल वास: उत्तर-पश्चिम में

नक्षत्र शूल: कोई नहीं

चन्द्र वास: पूर्व में 15:13तक, दक्षिण में 15:13 से

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