दीप द्विवेदीः जोशीजी! राह दिखाने वाले रिटायर्ड, बागी बाहर, बहस कौन करेगा?

खबरंदाजी. भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता मुरली मनोहर जोशी का कहना है कि- भारत को ऐसे नेतृत्व की जरूरत है, जो प्रधानमंत्री के सामने निडर होकर बात कर सके और उनसे बहस कर सके! अब इतने वरिष्ठ नेता को कौन बताए कि यह अटल-आडवाणी-जोशी वाली बीजेपी नहीं है? यह तो मोदी-शाह की बीजेपी है, जिसमें राह दिखाने वाले रिटायर्ड कर दिए गए है और बागी बाहर हो गए हैं! बहस कौन करेगा?

रही बात सिद्धांत की, तो इस समय तो एक ही सियासी सिद्धांत सफल है- कानून न कायदा, सत्ता बनी रहे तो ही फायदा! जोड़तोड़ जिंदाबाद?
खबर है कि.... पूर्व केंद्रीय मंत्री जोशी ने दिवंगत कांग्रेस नेता जयपाल रेड्डी को श्रद्धांजलि देने के लिए आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि- मेरा मानना है कि ऐसे नेतृत्व की बहुत जरूरत है, जो बेबाकी से अपनी बात रखता हो, सिद्धांतों के आधार पर प्रधानमंत्री से बहस कर सकता हो, बिना किसी डर के, और बिना इस बात की परवाह किए कि प्रधानमंत्री नाराज होंगे या खुश!

शत्रुघ्न सिन्हा ने रखी थी, क्या हुआ?

कभी बीजेपी के लिए भीड़ जुटाने वाले नेता को ही भीड़ का हिस्सा बना दिया गया! सिद्धांत का क्या करें? बीजेपी में योग्य नेताओं का अभाव है, इसीलिए तो अमित शाह को केन्द्रीय मंत्री के साथ-साथ बीजेपी अध्यक्ष का पद भी संभालना पड़ रहा है!

बीजेपी के 75 पार सारे वरिष्ठ नेता, येदियुरप्पा तो हैं नहीं कि उनके लिए कानून-कायदा तोड़ा जाए? खैर, आजकल 75 पार नेताओं की कोई सुनता नहीं है और युवाओं को एकदम फ्रेश इतिहास बताया जा रहा है, जिसके अनुसार आजादी के बाद किसी नेता की कोई खास उपलब्धियां नहीं है, जो भी उपलब्धियां हैं वे केवल 2014 के बाद की है और इसीलिए उत्पल भाई जैसी अभिव्यक्ति भी बेमतलब है! वर्ष 2025 के बाद नरेन्द्र भाई भी 75 पार हो कर सैद्धांतिक तौर पर आपके साथ होंगे, तब खुल कर उनसे चर्चा करना, बहस करना? 

कुछ समय पहले गोवा विधानसभा में विपक्ष के नेता चंद्रकांत कावलेकर के नेतृत्व में दस कांग्रेसी विधायक भाजपा में शामिल हो गए थे, तब इस राजनीतिक घटनाक्रम पर गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत मनोहर पर्रिकर के बेटे उत्पल पर्रिकर का कहना था कि- उनके पिताजी का यह रास्ता नहीं था? मेरे पिताजी ने जो रास्ता चुना था, निश्चित तौर यह उससे अलग है! उनके अनुसार... जब मेरे पिता का निधन हुआ, उसी दिन मुझे पता लग गया था कि उनका चुना हुआ रास्ता खत्म हो गया. लेकिन गोवा को इसके बारे में अब सीख मिली?

उत्पल पर्रिकर को कौन बताता कि कांग्रेस मुक्त भारत करते-करते कांग्रेस युक्त भाजपा होती जा रही है! लेकिन, सियासी समय बदल गया है, अब यह मोदी-शाह की बीजेपी है, अटल-आडवाणी की बीजेपी तो बहुत पीछे रह गई है? जनसंघ के नाम से तो बीजेपी पहले ही मुक्त हो गई थी, अब सिद्धांतों से भी मुक्त हो रही है! 

काश! यदि जनसंघ के नेता इसी राजनीतिक राह पर चले होते तो उसी समय सत्ता सुख भोग लेते? देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में कांग्रेस मुक्त भारत होता है या फिर कांग्रेस युक्त भाजपा बनती है!

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