नजरिया. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लंबे समय से सियासी उलझन में हैं, जिनसे राजनीतिक विचार मिलते हैं वे विपक्ष में हैं और जिनसे नहीं मिलते वे सत्ता में साथ हैं? अकेले लड़ नहीं सकते और साथ निभाना मुश्किल है! जाएं तो जाएं कहां?

खबर है कि.... बिहार में सत्ताधारी दल जदयू के नए नारे- क्यूं करें विचार, ठीके तो है नीतीश कुमार! के विरोध में राजद ने पटना स्थित अपने प्रदेश कार्यालय पर- क्यों ना करें विचार, बिहार जो है बीमार! पोस्टर लगाया है?

यह नारा बिहार में सत्ता में जदयू की सहयोगी भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉक्टर सीपी ठाकुर को भी नहीं जंचा, उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री के नाते बेहतर काम कर रहे हैं, लेकिन ‘ठीके तो हैं नीतीश कुमार! नारा गढ़ने का कोई तुक नहीं है?

यह पसंद तो सुशील मोदी को भी नहीं आया, उन्होंने ट्वीट किया- राज्य में विधानसभा के चुनाव होने में जब एक साल से ज्यादा वक्त बचा है, तब एनडीए के लिए यह चुनावी मोड में आने का नहीं, कार्यकाल की शेष अवधि में विकास के ज्यादा से ज्यादा काम करने का समय है!

उधर, आरजेडी का कहना है....

क्यूं न करें विचार?

पलटीमार है नीतीश कुमार.

जनादेश लूट लिया सरेबाजार.

चल रही हैं हवाला-हलाला की सरकार.

स्थापित हो गया राक्षसराज!

क्यूं न करें विचार?

कुर्सी के लालची है नीतीश कुमार.

शराबबंदी में भी मिल रहा शराब.

चहुँओर फैला दिया व्याभिचार!

सियासी सयानों का मानना है कि नीतीश कुमार को पता है कि सियासी समय बदलने पर बीजेपी कभी भी तेवर बदल सकती है, लिहाजा अपनी तरफ से प्रदेश के नेतृत्व की भूमिका पहले ही तैयार कर दी जाए, वरना उन्हें विधानसभा चुनाव भी पीएम मोदी के नेतृत्व में लड़ना पड़ जाएगा? वैसे भी बीजेपी, बिहार सीएम की गद्दी की ओर बढ़ रही है- बड़े आराम से! ऐसे में उन्हें क्यों रास आएगा नारा- क्यूं करें विचार, ठीके तो है नीतीश कुमार?

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