नजरिया. क्या मंदी और बढ़ती बेरोजगारी काल्पनिक मुद्दे हैं? खबर है कि.... क्या सरकार मंदी की बात स्वीकार कर रही है? इस प्रेस-प्रश्न पर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का कहना है कि मैं उद्योग प्रतिनिधियों से मिल रही हूं और उनकी समस्याएं और सरकार से वे क्या चाहते हैं? इस पर सुझाव ले रही हूं!

निर्मला सीतारमण का कहना है कि सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना जारी रखेगी, लेकिन अन्य वाहनों की कीमत पर नहीं. यही नहीं, उन्होंने यह भी कहा कि वस्तु एवं सेवा कर में कटौती करने से संबंधित फैसला जीएसटी काउंसिल लेगा?

हालांकि, उन्होंने यह स्वीकार करने से मना कर दिया कि अर्थव्यवस्था में मंदी है? वे कहतीं हैं- अर्थव्यवस्था में कोई सुस्ती नहीं है और सरकार उद्योगों की समस्याओं को ध्यान से सुन रही है, उन पर कदम उठा रही है.

लेकिन, जमीनी हकीकत कुछ अलग ही संकेत दे रही है, यही वजह है कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर घटकर छह साल  के निचले स्तर पांच प्रतिशत पर पहुंचने पर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने केन्द्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि- आर्थिक हालात बेहद चिंताजनक हैं? और यह नरमी मोदी सरकार के तमाम कुप्रबंधनों का परिणाम है!

उनका तो यह भी कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था लगातार गिरावट की राह को झेल नहीं पाएगी. लिहाजा, मैं सरकार से आग्रह करता हूं कि वह राजनीतिक प्रतिशोध की भावना को किनारे रखे और समझदार लोगों से बातचीत कर अर्थव्यवस्था को उबारे, जो पैदा किए हुए संकट में फंस गई है?

पूर्व प्रधानमंत्री सिंह का साफ कहना है कि भारत में बहुत तेज गति से बढ़ने की क्षमता है, लेकिन मोदी सरकार की ओर से की गई गलतियां आज की मंदी की वजह है! यह स्पष्ट है कि हमारी अर्थव्यवस्था नोटबंदी और जल्दबाजी में जीएसटी लागू करने की गलती से अब भी उबर नहीं पायी है, निवेशकों का भरोसा डगमगाया हुआ है?

इस मुद्दे पर प्रियंका गांधी भी लगातार आक्रामक हैं, उनका कहना है कि मंदी का हल निकालने के नाम पर भाजपा सरकार केवल मीडिया मैनेजमेंट कर रही है. जरुरत है- सरकार पूरी स्थिति स्पष्ट करे. रोजगार न जाएं इसका हल लाए. कम्पनियों-निवेशकों को भरोसा दिलाए और नए निवेशकों और रोजगारों को प्रोत्साहित करे. सरकार को सार्थक कदम उठाने चाहिएं.

मंदी और बढ़ती बेरोजगारी के मुद्दे पर राजस्थान के उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने केन्द्र सरकार के तौर-तरीकों पर प्रश्नचिन्ह लगाया है, उनका कहना है कि आज देश में आर्थिक मंदी के चलते अर्थव्यवस्था पूरी तरह से बेपटरी हो गई है, ऐसे में आरबीआई का केंद्र सरकार के निरंतर दबाव के कारण लाभांश और सरप्लस रिजर्व के रूप में सरकार को 1.76 लाख करोड़ रुपए देने का फैसला अनुचित है. सरकार इस राशि के उपयोग की स्थिति स्पष्ट करें.

उल्लेखनीय है कि कुछ समय पहले सीएम अशोक गहलोत ने भी अर्थिक मुद्दों पर पीएम मोदी सरकार पर निशाना साधा था, उनका कहना था कि- भारतीय अर्थव्यवस्था में संकट की स्थिति, जैसा कि वाइस चेयरमैन, नीति आयोग के बयान में परिलक्षित हो रही है, पूरे देश के लिए गंभीर चिंता का विषय है. लगभग सभी क्षेत्रों में समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, लाखों लोग रोजगार खो रहे हैं.

आम जनता तनाव में हैं और वह सरकार से जवाब चाहती है कि एनडीए सरकार अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और मंदी के इस दौर से बाहर निकालने के लिए क्या कदम उठाएगी?

याद रहे, पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के रोजगार के मुद्दे पर बीजेपी का राष्ट्रवाद भारी पड़ा था, लेकिन लंबे समय तक मंदी और बेरोजगारी के मुद्दे को दबाए रखना केन्द्र सरकार के लिए आसान नहीं होगा. इसका तुरंत असर भले ही केन्द्र सरकार पर तो नहीं होगा, परन्तु विभिन्न प्रदेशों के विधानसभा, नगरपालिका, पंचायत राज आदि के चुनावों पर दिखाई दे सकता है.

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