ऋषि पंचमी का त्यौहार भाद्रपद शुक्ल माह की पंचमी तिथि को मनाते हैं. इस दिन सप्त ऋषियों की पूजा की जाती है. ऋषि पंचमी के दिन महिलाएं ऋषियों की पूजा कर उनसे धन-धान्य, सुख-समृद्धि, संतान-सुख आदि की कामना करती हैं लेकिन इस व्रत का खास महत्व है-  रजस्वला काल में जाने-अनजाने हो गए पाप, दोष आदि से मुक्ति! 

जब इन्द्र ने त्वष्टा ऋषि के पुत्र वृत्र का वध किया तो उन्हें ब्रह्महत्या का पाप लगा. पाप मुक्ति के लिए ब्रह्मा ने इन्हें चार स्थानों में बाँटा- अग्नि- धूम मिश्रित प्रथम ज्वाला, नदियों- वर्षाकाल के पंकिल जल, पर्वतों- जहाँ गोंद वाले पेड़ होते हैं और स्त्रियों के रजस्वला काल में. अत: मासिक धर्म के समय जाने-अनजाने लगे पाप, दोष से छुटकारा पाने के लिए यह व्रत स्त्रियों को करना चाहिए. इसके लिए संकल्प इस प्रकार है-

अहं ज्ञानतोऽज्ञानतो वा रजस्वलावस्यायां कृतसंपर्कजनितदोषपरिहारार्थम्ऋषिपञ्चमीव्रतं करिष्ये. 

* ऐसा संकल्प कर के पश्चात अरून्धती के साथ सप्तर्षियों की पूजा करनी चाहिए... 

इस व्रत में केवल फलों आदि का सेवन करना चाहिए तथा हल से उत्पन्न किया हुआ अन्न नहीं खाना चाहिए. इस व्रत-पूजा में पुरुषों को यथासंभव ऋग्वेद का पाठ करना चाहिए.

ऋषि पंचमी के दिन महिलाएं घर में साफ-सफाई के बाद सप्त ऋषियों के साथ देवी अरुंधती की स्थापना करती हैं. सप्त ऋषियों की हल्दी, चंदन, पुष्प, अक्षत आदि से पूजा करके जाने अनजाने हुए अपराधों के लिए क्षमा मांगी जाती है. पूजा के बाद ऋषि पंचमी व्रत कथा सुनी जाती है तथा ब्राह्मण को भोजन करवाकर कर व्रत का उद्यापन किया जाता है.

ऋषि पंचमी की अनेक कथाएं हैं जो अलग अलग जगह पढ़ी-सुनी जाती हैं लेकिन इनका उद्देश्य ऋषि पंचमी का महत्व दर्शाना है इसलिए कोई भी कथा जो स्थानीय स्तर पर पढ़ी-सुनी जाती है उसे श्रद्धापूर्वक सुने, इसी तरह की एक कथा यहां पर दी जा रही है...

* प्राचीन काल में विदर्भ देश में उत्तक नामक ब्राह्मण अपनी पतिव्रता पत्नी के साथ रहता था. उसके परिवार में एक पुत्र और एक पुत्री थी. 

* उसने अपनी पुत्री का विवाह श्रेष्ठ ब्राह्मण के साथ कर दिया था लेकिन वह विधवा हो गयी और धर्मपालन करने के साथ वह अपने पिताश्री के घर ही रहने लगी. 

* अपनी पुत्री को दु:खी देखकर वह अपने पुत्र को घर पर छोड़कर अपनी पत्नी और पुत्री को लेकर गंगा किनारे आश्रम बनाकर रहने लगा. 

* एक दिन काम करते-करते थक कर पुत्री वहीं पत्थर की शिला पर सो गई तो रात में उसके शरीर में कीड़े पड़ गये. 

* पुत्री की ऐसी हालत देखकर ब्राह्मणी बहुत दुखी हो गई और पति से पूछने लगी इसकी हालत ऐसी क्यों हो गई? 

* ब्राह्मण ने ध्यान लगाया तो पता चला कि पूर्व जन्म में भी उसकी पुत्री ब्राह्मणी थी और एक बार रजस्वला होने पर उसने रजस्वलाकाल का धर्म नहीं निभाया था, इसके परिणामस्वरूप वह कष्ट भोग रही है. 

* ऐसे पाप निवारण के लिए श्रीकृष्ण ने युधिष्ठर को जानकारी दी थी और बताया था कि जो स्त्री रजस्वला होकर भी वर्जित कर्म करती है वह पाप की भागी बनती है. ऐसी स्थिति में जाने-अनजाने पाप कर्मों से मुक्ति के लिए हर स्त्री को ऋषि पंचमी का व्रत करना चाहिए.

* ऋषि पंचमी के दिन व्रत रखकर पूरे विधि-विधान से सप्तर्षियों की पूजा करने से व्यक्ति के सभी प्रकार के जाने-अनजाने पाप नष्ट हो जाते हैं. 

* अविवाहित स्त्रियों के लिए यह व्रत अत्यधिक महत्वपूर्ण और फलदायक माना जाता है. 

आज का राशिफल -

निम्न राशि के लिए उत्तम चन्द्रबलम अगले दिन सूर्योदय तक:

मेष, वृषभ, सिंह, 
तुला, धनु, मकर

*मीन राशि में जन्में लोगो के लिए अष्टम चन्द्र  

* यहां राशिफल चन्द्र के गोचर पर आधारित है, व्यक्तिगत जन्म के ग्रह और अन्य ग्रहों के गोचर के कारण शुभाशुभ परिणामों में कमी-वृद्धि संभव है, इसलिए अच्छे समय का सद्उपयोग करें और खराब समय में सतर्क रहें.

- मंगलवार का चौघडिय़ा -

दिन का चौघडिय़ा       रात्रि का चौघडिय़ा

पहला- रोग               पहला- काल

दूसरा- उद्वेग             दूसरा- लाभ

तीसरा- चर              तीसरा- उद्वेग

चौथा- लाभ               चौथा- शुभ

पांचवां- अमृत            पांचवां- अमृत

छठा- काल                छठा- चर

सातवां- शुभ              सातवां- रोग

आठवां- रोग              आठवां- काल

* चौघडिय़ा का उपयोग कोई नया कार्य शुरू करने के लिए शुभ समय देखने के लिए किया जाता है.

* दिन का चौघडिय़ा- अपने शहर में सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* रात का चौघडिय़ाअपने शहर में सूर्यास्त से अगले दिन सूर्योदय के बीच के समय को बराबर आठ भागों में बांट लें और हर भाग का चौघडिय़ा देखें.

* अमृत, शुभ, लाभ और चर, इन चार चौघडिय़ाओं को अच्छा माना जाता है और शेष तीन चौघडिय़ाओं- रोग, काल और उद्वेग, को उपयुक्त नहीं माना जाता है.

* यहां दी जा रही जानकारियां संदर्भ हेतु हैं, स्थानीय पंरपराओं और धर्मगुरु-ज्योतिर्विद् के निर्देशानुसार इनका उपयोग कर सकते हैं.

* अपने ज्ञान के प्रदर्शन एवं दूसरे के ज्ञान की परीक्षा में समय व्यर्थ गंवाएं क्योंकि ज्ञान अनंत है और जीवन का अंत है

पंचांग

मंगलवार, 3 सितंबर 2019

ऋषि पञ्चमी

सम्वत्सरी पर्व

शक सम्वत 1941 विकारी

विक्रम सम्वत 2076

काली सम्वत 5121

दिन काल 12:41:08

मास भाद्रपद

तिथि पंचमी - 23:28:55 तक

नक्षत्र चित्रा - 06:24:08 तक, स्वाति - 28:53:31 तक

करण बव - 12:37:00 तक, बालव - 23:28:55 तक

पक्ष शुक्ल

योग ब्रह्म - 22:57:36 तक

सूर्योदय 05:59:51

सूर्यास्त 18:41:00

चन्द्र राशि तुला

चन्द्रोदय 10:00:00

चन्द्रास्त 21:42:59

ऋतु शरद

दिशा शूल: उत्तर में

राहु काल वास: पश्चिम में

नक्षत्र शूल: कोई नहीं

चन्द्र वास: पश्चिम में

आज का दिन : ज्योतिष की नज़र में


जानिए कैसा रहेगा आपका भविष्य


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